मोहर्रम का पर्व बहुत ही अकीदत व गमगीन माहौल में संपंन्न

उतरौला,बलरामपुर(राष्ट्र की परम्परा) मोहर्रम का पर्व बहुत ही अकीदत व गमगीन माहौल में संपंन्न हुआ।क्षेत्र के मशहूर ताजियों की जियारत के लिए उमड़ी भीड़ खत्म होने का नाम ही नही ले रही थी।मोहर्रम की दसवीं तारीख को क्षेत्र के तमाम ताजियादारों ने अपने घरों, इमामबाड़ों व इमामचौक पर रोज़ा ए इमाम हुसैन व कर्बला के नक्शे में रखे ग‌ए ताजिये की जियारत किया। सुबह नौ बजे घरों, इमामबाड़ों व इमाम चौक पर मजलिस और नजर फातिहां का सिलसिला शुरू हुआ जो देर तक चलता रहा।नज्र नियाज के बाद ताजिया दारों ने जोहर की नमाज के बाद अपने घरों से ताजिया, जुलजना व ताबूत लेकर कर्बला की तरफ रवाना हुए लाउडस्पीकर पर धीमी स्वर में मरसिया और नोहा बजता रहा जुलूस में नंगे पैर काले लिबास में नौजवान,बूढ़े,बच्चे मातम करते नजर आए। इमाम हुसैन व कर्बला के बयानात व नोहा को सुनकर या हुसैन इमाम हुसैन या अली की सदाएं फिजाओं में बुलंद की।
कमर में घुंघरू बांधे व हाथों में मोर पंख लिए पायक बने लोगों ने चलकर ताजिया की जियारत कर अपनी मन्नत को पूरा किया।
क्षेत्र के उतरौला, हुसैनाबाद, नाऊडीह इटईरामपुर, गैड़ास बुजुर्ग,महदेइया,जैतिहवा, रानीपुर,चमरूपुर, कपौवा , गायडीह, मधपुर, लालगंज, चांद औलिया, सहित विभिन्न क्षेत्रों में लाखों रुपए की लागत से बनी ताजिया रखी गई,जो आकर्षण का केंद्र रहा। बड़ी ताजिया की जियारत करने के लिए लोगों का दिन भर तांता लगा रहा। शिया समुदाय के लोगों ने अपने इमामबाड़ा व घरों में छोटी ताजिया रखी। इमामबाड़ा में मजलिस का सिलसिला चलता रहा। इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत का बयान सुनकर सुन्नी व शिया समुदाय के लोगों की आंखें नम हो गई। शिया समुदाय के लोगों ने मातम कर अपने गम का इजहार किया।समाजसेवियों द्वारा कर्बला में शहीद हुए इमाम हुसैन व उनके लश्कर की प्यास की याद में जायरीनों व अकीदतमंदो के लिए गली मोहल्ले के विभिन्न स्थानों पर शबील लगाकर शरबत व पानी पिलाया गया। मोहर्रम दसवीं की तारीख पर आशूराका जुलूस निकाला गया। साथ ही मोहर्रम की नौवीं तारीख को रखे गए ताजिया को 10 मोहर्रम को अपने अपने क्षेत्र के कर्बला में दफन किया। वहीं मुहर्रम को लेकर प्रशासन खासा सतर्क रहा और संवेदनशील क्षेत्र में पुलिस की कड़ी चौकसी रही।जिम्मेदार अधिकारियों की टीम भ्रमण कर शांति व्यवस्थाओं की जायजा लेती रही।
क्षेत्र में मुहर्रम की दस तारीख को आशूरा का जुलूस उठता रहा है । जिसमें अलम ढोल ताशा ताजिया जुलजना, ताबूत शामिल रहा। अपने परंपरागत मार्ग से होता हुआ कर्बला में संपन्न हुआ वहीं पर ताजिया दफन किया गया।

rkpnews@desk

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