UP News के तहत एक बड़ी कानूनी हलचल देखने को मिली, जहां Rahul Gandhi की नागरिकता को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में सुनवाई हुई। इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से पेश अधिकारियों ने अदालत से आग्रह किया कि सुनवाई को सार्वजनिक रूप से न किया जाए।

केंद्र सरकार का अनुरोध: खुली अदालत में सुनवाई न हो

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसबी पाण्डेय ने कोर्ट से कहा कि गृह मंत्रालय से जुड़े दस्तावेज गोपनीय (Confidential) हैं। इसलिए इस मामले की सुनवाई खुले कोर्ट में करना उचित नहीं होगा।

इस पर न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई चैंबर (बंद कमरे) में करने का फैसला लिया।
UP News के अनुसार, यह कदम संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया।

गृह मंत्रालय के अधिकारी रिकॉर्ड के साथ हुए पेश

सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय के अधिकारी:

• अंडर सेक्रेटरी विवेक मिश्रा
• सहायक सेक्शन ऑफिसर प्रणव राय

अदालत में आवश्यक दस्तावेज लेकर उपस्थित हुए।

कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन किया और बाद में दस्तावेज वापस अधिकारियों को सौंप दिए।

याची को केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अनुमति

UP News में सामने आया कि अदालत ने याचिकाकर्ता को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार को इस मामले में पक्षकार (Party) बनाने की अनुमति दे दी है।
अब इस केस में केंद्र सरकार की भूमिका और अधिक स्पष्ट होगी।

क्या है पूरा मामला? (Rahul Gandhi Citizenship Case)

यह मामला कर्नाटक के एक भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है।

याचिकाकर्ता ने:
• Rahul Gandhi के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की
• नागरिकता से जुड़े आरोप लगाए
• विस्तृत जांच की मांग की

निचली अदालत के आदेश को दी गई चुनौती

याचिका में लखनऊ की एमपी/एमएलए कोर्ट के 28 जनवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें अदालत ने FIR दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया था।
अब हाईकोर्ट इस पूरे मामले की दोबारा सुनवाई कर रहा है।

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किन धाराओं में लगाए गए आरोप?

याचिकाकर्ता ने गंभीर आरोप लगाते हुए निम्न कानूनों का हवाला दिया:

• भारतीय नागरिकता कानून
• पासपोर्ट अधिनियम
• ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट

हालांकि, कोर्ट अभी केवल सुनवाई के स्तर पर है और अंतिम फैसला आना बाकी है।

अगली सुनवाई कब होगी?

UP News के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।

इस तारीख पर यह स्पष्ट हो सकता है कि:

• मामले में आगे जांच होगी या नहीं
• FIR दर्ज करने का आदेश दिया जाएगा या नही।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

यह मामला कई वजहों से अहम है:

• एक बड़े राष्ट्रीय नेता से जुड़ा है
• नागरिकता जैसे संवेदनशील मुद्दे पर आधारित है
• केंद्र सरकार और न्यायपालिका की भूमिका स्पष्ट होगी

UP News में यह केस आने वाले दिनों में और चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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