ग्रेटर नोएडा में निवेश और निर्यात का मंच, रायबरेली से अखिलेश की पीडीए यात्रा ने बढ़ाई गठबंधन की हलचल
विकास के दावों से चुनावी समीकरणों तक, यूपी में 2027 की सियासी जमीन तैयार

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश की राजनीति धीरे-धीरे 2027 विधानसभा चुनाव के रंग में रंगती नजर आ रही है। एक ओर विपक्षी खेमे में गठबंधन, सामाजिक समीकरण और राजनीतिक प्रभाव को लेकर गतिविधियां तेज हैं, वहीं दूसरी ओर योगी सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था, निवेश, विनिर्माण और निर्यात को चुनावी विमर्श का अहम आधार बनाने में जुटी है। ग्रेटर नोएडा में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो का चौथा संस्करण इसी आर्थिक नैरेटिव का बड़ा मंच बनकर सामने आया है।
प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की बदलती औद्योगिक तस्वीर, कानून-व्यवस्था, निवेश और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया। अमित शाह ने अपने संबोधन में प्रदेश के पुराने औद्योगिक माहौल की तुलना मौजूदा स्थिति से करते हुए कहा कि जहां पहले अपराध और अवैध गतिविधियों को लेकर उत्तर प्रदेश की चर्चा होती थी, वहीं अब रक्षा उत्पादन, वाहन निर्माण और चिकित्सा उपकरण जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं उभर रही हैं।
उन्होंने प्रदेश के छह रक्षा गलियारों—झांसी, चित्रकूट, लखनऊ, आगरा, अलीगढ़ और कानपुर—का उल्लेख करते हुए रक्षा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की भूमिका को रेखांकित किया। शाह ने देश के बढ़ते रक्षा उत्पादन और निर्यात के आंकड़ों का भी हवाला दिया तथा अमेठी में एके-203 राइफल निर्माण को औद्योगिक बदलाव का उदाहरण बताया।
केंद्रीय गृह मंत्री ने ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना का उल्लेख करते हुए भदोही के कालीन, फिरोजाबाद के कांच, सहारनपुर की काष्ठ कला, कन्नौज के इत्र और वाराणसी की रेशमी साड़ियों जैसे उत्पादों को स्थानीय रोजगार और वैश्विक बाजार से जोड़ने की बात कही। उनका जोर इस बात पर रहा कि प्रदेश में रोजगार और उद्यम के अवसर बढ़ने से युवाओं को बाहर जाने की आवश्यकता कम हो सकती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रदेश के पारंपरिक हुनर, आधुनिक तकनीक और मजबूत आपूर्ति शृंखला को आर्थिक विकास से जोड़ते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के उत्पादों और उद्यमियों के प्रति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसा बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 79 उत्पादों को जीआई प्रमाणन मिल चुका है, जबकि 75 अन्य उत्पादों के लिए आवेदन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने एक जनपद-एक उत्पाद, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा और विश्वकर्मा श्रम सम्मान जैसी योजनाओं के माध्यम से कारीगरों को प्रशिक्षण, उपकरण, ऋण और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। इस वर्ष के व्यापार शो में 90 देशों से 600 से अधिक विदेशी खरीदारों और करीब डेढ़ लाख कारोबारी आगंतुकों के पहुंचने की संभावना है। आयोजन में 2,400 से अधिक प्रदर्शकों की भागीदारी बताई गई है।
दूसरी तरफ चुनावी पिच पर तेज हुई सियासी हलचल
आर्थिक मंच पर सरकार जहां विकास और निवेश की तस्वीर पेश कर रही है, वहीं 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी राजनीति भी सक्रिय हो गई है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 24 सितंबर को रायबरेली से पीडीए रथयात्रा की शुरुआत की। रायबरेली कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का लोकसभा क्षेत्र होने के कारण इस यात्रा को गठबंधन की राजनीति के लिहाज से भी देखा गया।
अखिलेश यादव ने यात्रा के दौरान कांग्रेस के साथ गठबंधन को मजबूत बताया, हालांकि सीटों के बंटवारे और दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चाएं जारी हैं। कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस भी सैफई और कन्नौज जा सकती है। उनके इस बयान को दोनों दलों के बीच अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र को लेकर जारी संदेशों के रूप में देखा जा रहा है।
विकास बनाम सामाजिक समीकरण की बनेगी चुनावी बहस?
उत्तर प्रदेश की मौजूदा तस्वीर में दो समानांतर राजनीतिक धाराएं दिखाई दे रही हैं। सरकार निवेश, रोजगार, विनिर्माण, निर्यात और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के जरिए विकास का एजेंडा सामने रख रही है। वहीं विपक्ष सामाजिक समीकरणों, पीडीए और गठबंधन के जरिए चुनावी आधार मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
2027 के विधानसभा चुनाव में मतदाताओं के सामने कौन से मुद्दे सबसे प्रभावी रहेंगे, यह आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों से स्पष्ट होगा। फिलहाल ग्रेटर नोएडा का अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंच जहां उत्तर प्रदेश की आर्थिक संभावनाओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा है, वहीं रायबरेली से शुरू हुई राजनीतिक यात्रा प्रदेश की चुनावी सरगर्मी को नई दिशा देती दिखाई दे रही है।
