बीसवीं सदी के
दो ही महानतम अस्त्र रहे —
एक भारत के पास: अहिंसा
जिसे गाँधी ने चलाया
और दूसरा अमेरिका के पास:
परमाणु बम
जिसे ओपेनहाइमर ने चलाया।
यह अद्भुत था —
पर अंत और भी गूढ़ निकला।
जब गाँधी की अहिंसा ने
दुनिया को राह दिखाई —
तब ओपेनहाइमर ने भी
शान्ति का सन्देश सुनाया
हथियारों को बाँध दिया नियमों में
मानवता की बात उठाई।
–प्रतीक झा ‘ओप्पी’
चन्दौली, उत्तर प्रदेश
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