Saturday, January 24, 2026
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स्थानीय कवियों की रचनाओं ने रचा सांस्कृतिक सौहार्द का इतिहास

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)।गोरखपुर महोत्सव 2026 का समापन स्थानीय कवियों के भावपूर्ण और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत कवि सम्मेलन के साथ हुआ। इस साहित्यिक संध्या ने गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे और मानवीय मूल्यों का सशक्त संदेश दिया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन करते हुए चर्चित कवि मिन्नत गोरखपुरी ने अपनी पंक्तियाँ—
“सजा के अपने घर में गीता और कुरान रखते हैं,
जहां पर राम रखते हैं वहीं रहमान रखते हैं”—

पढ़ीं, जिस पर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामकृपाल राय ने की। सरस्वती वंदना के साथ कवि सम्मेलन की शुरुआत आशिया गोरखपुरी ने की, जिसने वातावरण को भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
इस अवसर पर डॉ. सरिता सिंह ने सामाजिक सौहार्द का संदेश देते हुए पढ़ा—
“दिल की क्यारी से नफरत के कांटे छोड़ दो यारो,
जहां से धर्म-मजहब की खाई पाट दो यारो।”

एकता उपाध्याय ने आशा और उजाले की बात करते हुए कहा—
“सुबह के उजालों से ज़िद तुम करो,
यह जो सूरज उगा है ढले ना कभी।”
संतोष संगम की पंक्तियाँ देशभक्ति और बदलते सामाजिक यथार्थ को रेखांकित करती रहीं—
“मर मिटेंगे देश पर हुए अलग-अलग थे,
अब किसी के लिए कोई मरता नहीं।”

कवि सुभानी सहित डॉ. आरके राय, अभय कुमार, आशिया गोरखपुरी, मोहम्मद शादाब सुभानी, डॉ. अरुण कुमार पांडे, परी श्रीवास्तव ने भी काव्य पाठ कर श्रोताओं को भाव-विभोर किया।
कार्यक्रम में डॉ. सौरभ पांडे, संजय मिश्रा, फजल खान, आदिल अमीन, मोहम्मद वाजिक शिबू, राजेश राज, आशीष रुंगटा, प्रशांत पांडेय, गोविंद, विवेक कुमार, आदित्य घोष, डॉ. अनीता पाल सिंह सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
गोरखपुर महोत्सव का यह समापन न केवल साहित्यिक उपलब्धि रहा, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का प्रेरक उदाहरण भी बना।

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