ख़ुद ही मुद्दई, ख़ुद ही मुद्दालय,
ख़ुद ही पुलिस ख़ुद न्यायालय,
ख़ुद ही गवाह ख़ुद ही पैरोकारी,
ख़ुद वकील ख़ुद जाँच अधिकारी।
जहाँ तक वह देख सकते हैं,
वहाँ तक सब उनके आधीन,
न कोई नियम न कोई क़ानून,
जो वह कह दें वही है क़ानून।
न किसी का मान और न सम्मान,
व्यर्थ के आरोप, व्यर्थ प्रत्यारोप,
न कोई सबूत न कोई जानकारी,
ज़्यादा जोश में मति गई है मारी।
यह कलियुग है धोखा प्रिय है,
पर इसका प्रसाद बारी बारी से,
हमको तुमको सबको मिलता है,
बिना धोखा काम नहीं चलता है।
ईमानदारी और त्याग के बदले,
कर्मठता और बलिदान के बदले,
जेल भिजवाने की ये धमकियाँ,
अर्जित कर ली सारी शक्तियाँ।
स्वार्थरत साथी, बिलबिलाते लोग,
मेरी बिल्ली और मुझसे ही म्याऊँ,
जिन्हें कुछ करने का अवसर दिया,
उन्होंने बदनामी का तोफ़ा दिया।
काम कर विकास का मौक़ा दिया,
जनता को भरमाने का कृत्य किया,
सर्व शक्तिमान जैसे वो बन बैठे हों,
आदित्य कुछ ऐसा भ्रम पाल लिया।
कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद के चर्चित अनिशा पाण्डे मृत्यु प्रकरण में अब एक अहम कानूनी…
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के घुघली थाना क्षेत्र में बुधवार देर रात एक तेज…
पराविधिक स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण से न्याय व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती: संजय कुमार यादव मऊ…
भारत का खुदरा बाजार एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। एक ओर सदियों पुराना पारंपरिक…
पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान शुरू, 152 सीटों पर लोकतंत्र का महासंग्राम कलकत्ता…
लेखक: राजकुमार अग्रवाल संयुक्त राज्य अमेरिका में शुरुआती 2025 से रिपब्लिकन पार्टी के निर्वाचित अधिकारियों…