नभ अच्छादित मेघों से
यह विनय मैं करता हूँ,
भाग भाग कर थकते हो,
ठहरो, बरसो, हल्के हो।
माना कावंड ले चले सभी,
शिव – अर्पण हेतु सुजल,
हों प्रसन्न शिव भोलेबाबा,
धरती अम्बर काले बादल।
उमड़ घुमड़ के आओ बरसो,
गर्जन तर्जन ज़्यादा न करें,
धरती माँ को भी संतुष्ट करें,
जन मानस के जलद बरसें।
सावन की महिमा न्यारी है,
वर्षा ऋतु का पवित्र महीना,
हरियाली चहुँ ओर है दिखती,
जब दहलाते बादल हैं सीना।
झूले पड़ जाते बागों पेड़ों में,
सखियाँ आनंद हिलोरे लेती हैं,
श्याम घटा घनघोर घिर जाती,
शीतल पवन मस्त हो मदमाती।
आदित्य उपवन में मोर नाचते हैं,
कोयल कुहू कुहू का राग सुनाती,
भौंरे गुन गुन का मद मस्त हो रहे,
प्रकृति मनोहरता है लेकर आती।
कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ
महबूब नगर गांव में दहशत, ग्रामीणों का वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन; हिंसक जानवर की…
बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। मटेरा थाना क्षेत्र में बाइक सवार बदमाशों ने दिनदहाड़े चेन स्नैचिंग…
बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक बन गया।…
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया शहर के मालवीय रोड ओवरब्रिज पर सोमवार को उस समय…
तेहरान/वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर…
शामली (राष्ट्र की परम्परा)। हरियाणवी गायक अंकित बालियान हत्याकांड में शामली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई…