Hindi Poetry

नदियाँ और उनका रौद्र रूप

नदियाँ अपना रौद्र रूप धरती हैं, तो सिर्फ़ घर नहीं बहते- बह जाते हैं सपने भी, किसी माँ की उम्मीद,…

1 month ago

छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार,अब तो बिककर छप रहे, कलम है शर्मसार॥

✍️ डॉ. प्रियंका सौरभ सच की कीमत लग गई, बोली लगे बाज़ार,ख़बरों के भी दाम हैं, बिकता हर विचार।इश्तहारों के…

5 months ago

अच्छा पेड़–अच्छा फल

✍️ डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’ ‘विद्या वाचस्पति’ जीवन सफ़र उनके लिए सुहावना है,जो इस सफ़र का आनंद उठाते…

8 months ago