घुमक्कड़ी का दर्शन और ज्ञान का विराट संसार: राहुल सांकृत्यायन
नवनीत मिश्र “सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल, ज़िंदगानी फिर कहाँ… ज़िंदगी गर कुछ रही, तो ये जवानी फिर कहाँ॥”उक्त पंक्तियाँ केवल काव्य-सौंदर्य नहीं, बल्कि जीवन को खुली आँखों से देखने…
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नवनीत मिश्र “सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल, ज़िंदगानी फिर कहाँ… ज़िंदगी गर कुछ रही, तो ये जवानी फिर कहाँ॥”उक्त पंक्तियाँ केवल काव्य-सौंदर्य नहीं, बल्कि जीवन को खुली आँखों से देखने…