Tag: भारतीय ज्ञान परंपरा

भारतीय भाषाओं में ज्ञान-विज्ञान का विस्तार जरूरी, बीबीएयू में दो दिवसीय कार्यशाला का समापन

भारतीय भाषाओं को शिक्षा, शोध और ज्ञान-सृजन का सशक्त माध्यम बनाने पर जोर लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में भारतीय भाषाओं को शिक्षा, शोध और ज्ञान-सृजन…

भारतीय दृष्टि से लिखा जाए इतिहास, औपनिवेशिक सोच से बाहर निकलने का समय: डॉ. बालमुकुंद पांडे

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय इतिहास को विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों और औपनिवेशिक इतिहासकारों के नजरिए तक सीमित रखना देश के गौरवशाली अतीत के साथ अन्याय है। समय की मांग…

लोकसंग्रह पर आधारित पुस्तकों का गोरखपुर विश्वविद्यालय में विमोचन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने राजनीति विज्ञान विषय की दो महत्वपूर्ण पुस्तकों “लोकसंग्रह: द भारतीया मॉडल-ए टाइमलेस विजन फॉर ग्लोबल लीडरशिप”…

संस्कृत और पालि भाषा भारतीय ज्ञान परंपरा की आधारशिला

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। राजकीय बौद्ध संग्रहालय गोरखपुर तथा संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत एवं पालि साहित्य का अवदान”…

विशाल भारत का भूगोल: दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परंपरा के दृष्टिकोण से विशाल भारत का भूगोल: एक स्थानिक-कालिक परिप्रेक्ष्य” विषय पर…

भारतीय ज्ञान परंपरा में लोक और शास्त्र का अद्भुत समन्वय: प्रो. अनामिका राय

ज्ञान से भारतीयता परिभाषित होती है, भारतीयता से ज्ञान नहीं: प्रो. अनामिका राय गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग में राजकीय…

बौद्ध दर्शन और संस्कृति को जोड़ता पालि साहित्य

अद्वितीय है भारतीय ज्ञान परंपरा में पालि साहित्य का योगदान, गोरखपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने और उसे वैश्विक संदर्भ में…