बांका (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिले के अमरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत मध्य विद्यालय, लौसा से एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां कक्षा दसवीं के एक छात्र ने साइबर ठगी की साजिश रचते हुए अपने ही स्कूल के प्रधानाध्यापक को निशाना बनाने की कोशिश की। छात्र ने खुद को जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) के रूप में प्रस्तुत करते हुए एक फर्जी कॉल किया और ई-शिक्षा कोष की राशि ट्रांसफर कराने की योजना बनाई थी।
मिली जानकारी के अनुसार, छात्र ने किसी तरह स्कूल प्रिंसिपल का मोबाइल फोन हैक कर लिया और उसमें मौजूद ई-शिक्षा ऐप से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की। इसके तहत उसने फोन पर डीईओ बनकर बात करते हुए यह जताने का प्रयास किया कि एक आवश्यक प्रक्रिया के तहत तत्काल कुछ धनराशि ई-शिक्षा कोष से ट्रांसफर करनी है।
हालांकि, प्रिंसिपल को बातचीत के दौरान छात्र की भाषा और व्यवहार पर शक हो गया। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए तुरंत जिला शिक्षा पदाधिकारी से संपर्क कर इस कॉल की सत्यता की जांच की। डीईओ कार्यालय द्वारा ऐसी किसी कॉल या निर्देश से इनकार किए जाने पर पूरा मामला सामने आया। समय रहते कार्रवाई होने से सरकारी राशि ठगी का शिकार होने से बच गई।
पुलिस को सूचना, जांच में जुटी साइबर सेल
मामले की जानकारी स्थानीय थाना अमरपुर को दी गई है और फिलहाल पुलिस ने छात्र को चिन्हित कर लिया है। साइबर सेल की टीम भी तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच में जुट गई है कि छात्र ने यह कार्य अकेले किया या किसी गिरोह से प्रेरित होकर। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि छात्र को मोबाइल हैकिंग और ऐप एक्सेस की तकनीकी जानकारी कहां से प्राप्त हुई।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, स्कूलों में डिजिटल सुरक्षा की आवश्यकता
इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब एक स्कूली छात्र इस स्तर की साइबर साजिश रच सकता है, तो आने वाले समय में ऐसी घटनाएं और भी जटिल रूप ले सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में साइबर सुरक्षा को लेकर शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए विशेष प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए।
प्रशासन सख्त, जल्द होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने घटना को गंभीर मानते हुए स्कूल प्रशासन को छात्र के विरुद्ध आवश्यक अनुशासनात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, सभी प्रधानाध्यापकों को अलर्ट किया गया है कि किसी भी वित्तीय या तकनीकी निर्देश को उच्च अधिकारियों से पुष्टि के बिना अमल में न लाएं।
यह मामला एक चेतावनी है कि स्कूलों में डिजिटल साक्षरता के साथ-साथ डिजिटल नैतिकता और सुरक्षा पर भी ध्यान देना अब समय की मांग है।
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