सामाजिक बहुउद्देश्यीय परियोजना के लिए ढाई साल से किया जा रहा है आंदोलन
फिर भी सरकार बनी मूकदर्शक
मुंबई(राष्ट्र की परम्परा)
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा देश को आजादी दिलाने के लिए अनेकों आंदोलन और सत्याग्रह किए गए, उसका नतीजा यह निकला था कि भारत देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति मिली थी। कहने का तात्पर्य यह है कि उस समय आंदोलन, धरना प्रदर्शन को सरकारें गंभीरता से लेती थी। किंतु आज के दौर में सरकार आम आदमी की समस्याओं के लिए आंदोलन करने वालों की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही। कुछ ऐसा ही नजारा मुंबई के आजाद मैदान में देखने को मिला है। जहां पर वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश गायकवाड़ घाटकोपर के भीमनगर में एक अनारक्षित भूखंड पर विपश्यना केंद्र, सामुदायिक भवन, झुग्गी पुनर्वास और अन्य सामाजिक बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं के निर्माण के लिए सरकार से पत्राचार कर ढाई साल से आज़ाद मैदान में धरना दे रहे हैं। किंतु सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है।उन्होंने चेतावनी दी है कि सरकार इन मांगों को गंभीरता से ले अन्यथा इस अनिश्चितकालीन आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।
सुरेश गायकवाड़ ने बताया कि इस भूखंड पर अमीरों के लिए सरकार की ओर से अलग-अलग प्रोजेक्ट किये जाने थे, लेकिन लगातार ढाई साल के पत्र व्यवहार बाद मैंने इन प्रोजेक्टों को चलने नहीं दिया। मनपा एमएमआरडीए, महाराष्ट्र सरकार, केंद्र सरकार, रेलवे की कई परियोजनाओं को अवरुद्ध कर दिया है और यह भूखंड आम गरीब लोगों की सामाजिक सुविधाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया है। सरकार भी वादा तो कर रही है लेकिन अमल नहीं कर रही।
सुरेश गायकवाड़ ने सवाल उठाया है कि सरकार अडानी अंबानी और अन्य बड़े पूंजीपतियों को तुरंत प्लॉट उपलब्ध कराती है। फिर ऐसे निःशुल्क भूखंड गरीब लोगों को क्यों उपलब्ध नहीं कराये जाते।
आज़ाद मैदान में धूल , धुंआ और हवा सहते हुए कई बार मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। मेरी मांग आम आदमी को न्याय दिलाने की है। इस मौके पर सुरेश गायकवाड़ ने कहा कि अगर सरकार आम आदमी को न्याय नहीं देगी तो हमारे आंदोलन का क्या फायदा ।
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