औरैया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और जनोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी ने सभी अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। जूम मीटिंग के माध्यम से उन्होंने जनपद, तहसील और विकासखंड स्तर के अधिकारियों को प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक अनिवार्य रूप से जनसुनवाई करने और प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनसुनवाई केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास का माध्यम है। जनसुनवाई में प्राप्त प्रत्येक आवेदन का विधिवत पंजिका में अंकन कर संबंधित प्रकरणों पर त्वरित कार्रवाई की जाए और आवेदक की संतुष्टि को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने कहा कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए। यदि कोई मामला संबंधित विभाग या अधीनस्थ कर्मियों से जुड़ा हो तो अधिकारी स्वयं निगरानी करते हुए समाधान सुनिश्चित करें। लापरवाही, टालमटोल या गलत रिपोर्टिंग किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को प्रतिदिन अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ समीक्षा बैठक कर लंबित मामलों, विशेषकर जनसुनवाई से जुड़े प्रकरणों की प्राथमिकता से समीक्षा और निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नियमित समीक्षा से कार्यों में तेजी और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
प्रशासनिक संचार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी कार्यालयों के लैंडलाइन नंबर एक सप्ताह के भीतर सक्रिय कराने के निर्देश दिए गए। विभागीय मोबाइल और लैंडलाइन नंबरों की जानकारी जनपद की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी, ताकि आमजन को संपर्क में सुविधा हो।
इसके अलावा, सभी सरकारी कार्यालयों के नियमित निरीक्षण के निर्देश देते हुए साफ-सफाई, अभिलेख, उपस्थिति पंजिका, जनसुनवाई व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं की पटलवार निरीक्षण आख्या अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने को कहा गया। जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और अपर जिलाधिकारी द्वारा आकस्मिक निरीक्षण भी किए जाएंगे। कमी पाए जाने पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
आगामी वृक्षारोपण अभियान को लेकर भी जिलाधिकारी ने विभागों को अभी से तैयारी करने, भूमि चिन्हांकन और पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इन सख्त निर्देशों से जनपद में पारदर्शिता बढ़ेगी, अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और आम जनता को समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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