अम्बर से उड़ उड़कर भँवरा
जब धरती पर आता है,
देख देख सुनहरे बाग को,
भ्रमर वहीं मँडराता है,
कुसुमित पुष्पों की सुरभित,
कलियों पर जा जाकर,
प्रेमगीत गुनगुनाता है, हृदय से
निकला मधुर गीत गाकर,
छुप जाता है अक्सर भँवरा,
कलियों में लजा लजाकर।
आया वसन्त प्रेम गीत गाकर।
गेंदा, गुलमेहंदी गमकें, रात में
सुस्तायें महक बिखराकर,
वन उपवन एहसास दे रहे,
बहती पवन मधुरम् पावन,
चहकें चिड़ियाँ प्यारी सी बेला में
आदित्य गीत गा गाकर,
वीणावादिनि का सरगम, आया
यौवन श्रृंगार सजा सजाकर।
आया वसन्त प्रेम गीत गाकर।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मंशा के अनुरूप…
बलिया(राष्ट्र की परम्परा ) महर्षि भृगु की तपोभूमि को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने…
डॉ. अरविंद राजभर के प्रस्तावित कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए डाक बंगले में हुई…
सुधार नहीं होने पर पूरे माह का वेतन रोकने की चेतावनी, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता…
जिलाधिकारी ने विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र का किया निरीक्षण, व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश देवरिया…
एफएलसी कार्य में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी…