मुंबई(राष्ट्र की परम्परा)
दिनोदिन बढ़ती गर्मी का असर इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों पर भी पड़ने लगा है। विशेष रूप से ऊँची उड़ान भरने वालों के लिए, चिलचिलाती गर्मी उन्हें मारती हुई प्रतीत होती है। भीषण गर्मी से इंसानों के साथ पशु-पक्षी भी बेहाल हैं, और हर कोई अपने-अपने तरीके से इसका समाधान ढूंढ रहा है। इसलिए ‘स्पैरोज़ शेल्टर’ संस्था ने अनुरोध किया है कि सभी नागरिकों को अप्रैल और मई की गर्मी के दिनों में पशु पक्षियों को बचाने का प्रयास करना चाहिए। संस्था ने उम्मीद जताई है कि लू के दौरान पशु-पक्षियों की सुरक्षा के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। संस्था के प्रवक्ता ने बताया कि ‘स्पैरो शेल्टर’ संस्था के स्वयंसेवकों ने एक माह में लू से पीड़ित करीब 150 से 200 पक्षियों का इलाज किया है।बता दें कि ‘स्पैरोज़ शेल्टर’ संस्था पिछले 15 वर्षों से पक्षियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए प्रयास कर रही है, यह मानते हुए कि गर्मी के दिनों में पानी की कमी और भीषण गर्मी के कारण पक्षियों के जीवन की गुणवत्ता खतरे में है। संगठन के स्वयंसेवकों ने विभिन्न घरेलू और सार्वजनिक स्थानों पर पानी देना शुरू कर दिया है। संस्था के अध्यक्ष प्रमोद माने ने सभी नागरिकों से इसी प्रकार अपने घर के सामने छोटी कटोरी के माध्यम से पक्षियों के लिए ताजा पानी उपलब्ध कराने की अपील की है। विशेषकर चील एक ऐसा पक्षी है जो आकाश में बहुत ऊँचा उड़ता है, इसलिए सूर्य की तीव्र गर्मी के कारण ऐसे पक्षी जमीन पर चक्कर खाते हुए पाए जाते हैं। इस वजह से उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ती है। स्पैरो शेल्टर के अध्यक्ष प्रमोद माने ने नागरिकों से अपील की है कि अत्यधिक गर्मी होने पर ये पक्षी घायल हो जाते हैं और निर्जलीकरण के कारण मर जाते हैं।
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