सलेमपुर में न्यायालय के आदेश जमीन से बेदखली करने का प्रकरण
सलेमपुर,देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) बीते दिनों सलेमपुर के हरैया में मझौली राज मोड़ के पास सालो से रह रहे राजभर परिवार के रिहायसी झोपड़ियों पर न्यायालय के आदेश पर बुलडोजर चल गया जिससे इन लोगो का आशियाना उजड़ गया इस प्रकरण में जिले के कई संगठन और कई पार्टी के कार्यकर्तो ने इस पूरे प्रकरण का विरोध किया । ऐसा नहीं है की यह न्यायालय के आदेश पर हुई यह पहली कार्यवाही थी पहले भी न्यायालय के आदेश पर तहसील क्षेत्र के ग्राम डुमवलिया में एक तिवारी परिवार के बहुमंजिली इमारत को जमींदोज किया जा चुका है ।लेकिन वहा सरकारी जमीन का मामला था यहां खरीदी जमीन का प्रकरण है । अब इस प्रकरण से जुड़े दोनो पक्ष पत्रकारों से वार्ता कर अपनी अपना अपना पक्ष रख रहे है । इस प्रकरण में लोगो के बीच खूब चर्चा हुई की भूमि विवाद में गलत करने पर कोतवाल लाइन हाजिर हुए इस विवाद में तमाम तरह के आरोप भी जड़े गए , कई समाचार पत्रों ने भी खूब लिखा लेकिन क्या सत्य है इसे जानना बेहद जरूरी है।
इस जमीन को लेकर कुछ दिन पहले हुए विवाद में खूब सियासत भी हुई ,सभी राजनैतिक पार्टियों ने अपनी अपनी रोटियां सेंकी। मझौली मोड़ स्तिथ आराजी नंबर चौदह के जमीन पर कब्जा पाने की लड़ाई वादी द्वारा लगभग चालीस सालों से देवरिया दिवानी न्यायालय में लड़ा जाता रहा है । लंबे समय की इस मुकदमे बाजी में वादी के परिवार का एक पुस्त खत्म हो गया ।आखिर कोर्ट का आदेश वादी के पक्ष में आया ।आदेश के बाद न्यायलय के अमीन कोतवाली थाना सलेमपुर से कोर्ट में जमा राशि के हिसाब से पुलिस बल की मांग करने पहुंचते है जिसपर सलेमपुर कोतवाली से अमीन को न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए पुलिस बल उपलब्ध कराया गया और बेदखली की कारवाई शुरू हुई , यहा यह देखना होगा कि पुलिस का काम होता है सर्व प्रथम शांति व्यवस्था यानी ला एंड ऑर्डर को बरकरार रखना मौके पे मौजूद पुलिस बल द्वारा थाना पर एक सूचना जाती है की साहब यहा लोग विरोध और खुद को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे है जिससे बड़ी घटना हो सकती है जिसके बाद कोतवाली प्रभारी उमेश बाजपेई शांति व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए मौके पे और पुलिस बल को भेजते है परंतु लोगो का एक हुजूम पुलिस के उपर भारी पड़ता है जिससे पुलिस कुछ लोगो को वहा से लाकर थाने पर बैठा देती है जिससे कोर्ट के आदेशों का पालन हो सके हालाकि इतने में राज्य मंत्री वहा पहुंचती है और कहानी बदल जाती है ,आरोप प्रत्यारोप तो पुलिस पे ही लगे इसकी वजह एक ये भी रही की अमीन को कोई नही जानता था ना ही उनका नाम और ना ही उनकी पहचान ,ये तो हुई जमीन की बात ,बात अगर कारवाई की की जाए तो इस प्रकरण के बाद कोतवाली प्रभारी उमेश बाजपेई को लाइन हाजिर कर दिया जाता है वैसे ये कोई नई बात नही ,बली का बकरा तो किसी को बनना ही था वर्ना राजनीति कमजोर हो जाती ।
इस संदर्भ में जब राजभर पक्ष से वार्ता की गई तो उन्होंने बताया –
साहब हमे बिना नोटिस दिए उजाड़ दिया गया हमारे घर में एक महीने बाद शादी थी ,अब तक हम सब खुली आसमान में सोने को मजबूर है।हालाकि ये सब इसलिए भी हो गया क्युकी वहा रह रहे राजभर बेहद गरीब तब्ते से आते है और रोज कमाना और रोज खाने की जिंदगी जी रहे है ऐसे में कोर्ट मुकदमा की कारवाई बेहद मुश्किल होती है
वही न्यायालय में मुकदमा लड़ रहे अंसारी परिवार से बात करने पर उन्होंने बताया –
अंसारी परिवार के द्वारा न्यायालय में जो मुकदमा लड़ा जा रहा है उनसे बात करने पर उन्होंने बताया की हम चाहते है की हमारी जमीन हमे दे दी जाए साथ ही उन्होंने एक अखबार का हवाला देते हुए कहा की मैने खबर पढ़ी की मेरी जमीन सड़क में जा चुकी है और मुझे मुवावजा मिला है ऐसे में मैं पैमाईश किए अधिकारी तथा अखबार के लेखक से पूछना चाहता हु की क्या मुझे एक रसीद देंगे जिसमे ये लिखा हो की मुझे मुवावजा मिला है । हम वहा न्यायालय के आदेश पर गए थे पुलिस ने वहा कोई ज्यादती नहीं की वहा पर निवास करने वाले लोगो द्वारा पुलिस को और हम सबको गलियां दी जाने लगी और पत्थर चलाया गया जिसपर पुलिस ने वहा से कुछ लोगो को पकड़ कर थाने ले गई ।
पुलिस पर लगे आरोप क्या सही –
एक अखबार द्वारा पुलिस को आरोपी बनाया गया यहां सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा होता है की क्या इस विवाद में प्रभारी के ऊपर कोई अपराधिक मुकदमा दर्ज हुआ था या ये महज व्यक्तिकत खुन्नस था।
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