मझवलिया गांव में दूसरे दिन भी पसर्रा सन्नाटा

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। नवानगर के मझौलिया गांव में नाली निर्माण को लेकर तनाव इस कदर बढ़ गया कि मामला पुलिस और ग्रामीणों के बीच टकराव तक पहुंच गया। गुरुवार को हुई इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी। दोनों पक्षों के बीच ईंट-पत्थर चलने की बात सामने आई है, जिसमें कुछ पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों को चोटें आई हैं, वहीं दर्जनों महिलाएं और बच्चे हिरासत में लिए गए। ग्रामीणों के अनुसार गांव में नाली निर्माण का कार्य बिना ग्रामसभा और पंचायत राज अधिनियम के नियमों के तहत समिति की सहमति के शुरू किया गया था। प्रधान प्रतिनिधि हरेराम पर आरोप है कि उन्होंने पंचायत राज अधिनियम की प्रक्रिया को दरकिनार कर खड़ंजा के बीच खुदाई का आदेश दिया, जिससे पहले से मौजूद खड़ंजा क्षतिग्रस्त हो गया। ग्रामीणों ने चार माह पूर्व से ही इस पर आपत्ति जताई थी और इसकी शिकायत ब्लॉक, तहसील और थाने में की थी, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
घटना के दिन जब नाली खुदाई शुरू की गई तो ग्रामीणों ने विरोध किया। आरोप है कि इसी दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच कहासुनी बढ़ गई, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई। पुलिस बल ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें कई महिलाएं और बच्चे घायल हुए। कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने बिना महिला पुलिसकर्मियों के ही महिलाओं को पकड़कर हिरासत में लिया। इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
घटना की सूचना मिलते ही प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और पूर्व विधायक भगवान पाठक ने बयान जारी कर प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं दोषी थीं, तो महिला पुलिसकर्मियों के माध्यम से गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई? उन्होंने यह भी कहा कि मौके पर मौजूद किसी भी पुलिसकर्मी के पास न तो हेलमेट था, न ही सुरक्षा प्रोटेक्टर, जबकि अधिकारी पहले से संभावित विवाद की जानकारी रखते थे।
वहीं, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अखिलेश सिंह गुड्डू ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि प्रधान प्रतिनिधि को पंचायत राज अधिनियम की जानकारी नहीं है। अगर नियमों के तहत पांच सदस्यीय टीम की निगरानी में खड़ंजा हटवाकर नाली बनाई जाती तो विवाद की नौबत ही नहीं आती। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम सभा का पैसा और समय बचाने के लिए 5 मीटर दूर स्थित पुरानी नाली से इस नाली को जोड़ दिया जाता, जिससे विकास कार्य भी पूरा होता और विवाद भी टल जाता।
फिलहाल पुलिस प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को भेज दी है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई है, और स्थिति अब नियंत्रण में है। कई लोगों को हिरासत में लिया गया है और आगे की जांच जारी है।
ग्रामीणों ने इस पूरी घटना की न्यायिक जांच की मांग की है और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते पंचायत और प्रशासन सजग होते तो इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को टाला जा सकता था।मझौलिया में नाली निर्माण से उपजा विवाद प्रशासनिक लापरवाही, पंचायत राज नियमों की अनदेखी और जनसुनवाई की विफलता का परिणाम है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्षेत्रीय लोग चाहते हैं कि दोषियों पर कार्रवाई हो और भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हों।

Karan Pandey

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