उदासीन आश्रम में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन, दर्जनों महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा

तुलसीपुर/बलरामपुर (राष्ट्र की परम्परा)।
बाबा उत्तम दास उदासीन आश्रम में जगतमणि तिवारी व पत्नी नीलम तिवारी द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मंदिर से लेकर गायत्री मंदिर तक दर्जन ऑन महिलाओं ने सर पर कलश वी पीतांबर वस्त्र धारण कर कलश यात्रा निकाली। तथा गायत्री मंदिर से पुणे उत्तम दास उदासीन आश्रम मंदिर पहुंचकर कलश को श्रीमद् भागवत कथा हेतु स्थापित किया गया।
कानपुर नगर से आई सरस कथा वाचिका रुचि शास्त्री ने गौकर्ण और धुंधकारी की कथा का रसपान कराया। कथा में बताया कि तुंगभद्रा नदी के तट पर आत्मदेव नामक एक व्यक्ति रहता था। उसकी पत्नी का नाम धुंधुली था। वह झगड़ालू किस्म की थी। संतान न होने के कारण पति परेशान रहता था। बुढ़ापे में संतान का मुख देखने को नहीं मिलेगा तो पिंडदान कौन करेगा।
कथावाचक ने आगे बताया कि वह आत्मदेव दुखी मन से आत्महत्या के लिए कुआं में कूदने वाला था तभी एक ऋषि ने उसे बचा लिया। ऋषि ने पूछा क्यों आत्महत्या करने जा रहे हो। इसके बाद ऋषि की बात को सुनकर आत्मदेव ने कहा ऋषिवर मेरे एक भी संतान नहीं है। इसके अलावा मैंने गाय पाल रखी है। गाय के भी संतान नहीं है। इस कारण आत्महत्या करने का कदम उठाया। यह सुनकर ऋषि ने अपने थैले से फल निकालकर कहा कि तुम यह फल अपनी पत्नी को खिला देना, इससे एक संतान की प्राप्ति होगी।

घर जाकर आत्मदेव ने फल अपनी पत्नी को दिया, लेकिन पत्नी ने सोचा कि अगर गर्भवती वो गई तो 9 महीने तक कहीं आने-जाने का मौका नहीं मिलेगा। अंतत: उसने फल को नहीं खाया। एक दिन उसकी बहन घर आई। उसने सभी किस्सा बहन को सुनाया। बहन ने कहा मैं गर्भवती हूं। प्रसव होने पर बच्चा तुम्हें दे दूंगी। तुम ये फल गाय को खिला दो। आत्मदेव की पत्नी ने अपनी बहन की बात में आकर फल गाय को खिला दिया। कुछ दिन के बाद धुंधुली को उसकी बहन ने बच्चा दे दिया। इसके बाद संतान को देखकर आत्मदेव बड़ा खुश हुआ। बच्चे का नाम एक विद्वान पंडित ने धुंधकारी रख दिया। इसके बाद गाय ने भी एक बच्चे को जन्म दिया जो मनुष्याकार था पर उसके कान गाय के समान थे। उसका नाम गोकर्ण रख दिया ।
कथावाचिका ने आगे बताया कि गोकर्ण और धुंधकारी दोनों गुरुकुल गए। गुरुकुल में अपना कार्य खुद करना पड़ता है। इस बीच धुंधकारी नशेड़ी, चोर निकल गया। एक दिन उसने अपनी माता को मार डाला। पिता व्यथित होकर वन चले गए। धुंधकारी वेश्याओं के साथ रहने लगा। वेश्याओं ने एक दिन धुंधकारी को मार डाला। मरने के बाद धुंधकारी भूत-प्रेत बन गया। धुंधकारी का भाई अपने घर में सोया रहता था, तभी प्रेत धुंधकारी ने आवाज लगाई कि भाई मुझे इस योनि से छुड़ाओ। गौकर्ण त्रिकाल संध्या की पूजा करते थे। तभी सूर्यनारायण भगवान से पूछते हैं कि इसके लिए क्या उपाय करना पड़ेगा। सूर्यनारायण ने कहा कि तुम सात गांठ बांस मंगाओ और भागवत का आयोजन करो। हर दिन बांस की गांठ धीरे-धीरे फट जाती है, जो सात दिन फटती है। तब पवित्र होकर धुंधकारी एक दिव्य रूप धारण करके सामने खड़ा हो जाता है।
कथा में बाबा शिव दर्शन दास, निक्कू बाबा, प्रतिभा, रेनू, बड़का, नीलम, मनीष तिवारी आदि ने कथा का रसपान कर श्रीमद् भागवत कथा की जय जयकार किया।

rkpnews@desk

Recent Posts

हिंसक जंगली जानवर ने आंगन में सो रहे युवक को बनाया शिकार, घर के पीछे झाड़ियों में मिला क्षत-विक्षत शव

महबूब नगर गांव में दहशत, ग्रामीणों का वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन; हिंसक जानवर की…

2 days ago

बहराइच में दिनदहाड़े चेन स्नैचिंग: ई-रिक्शा से जा रही महिला का मंगलसूत्र छीनकर भागे बाइक सवार बदमाश, CCTV में कैद हुई वारदात

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। मटेरा थाना क्षेत्र में बाइक सवार बदमाशों ने दिनदहाड़े चेन स्नैचिंग…

2 days ago

देवरिया में सनसनी: ओवरब्रिज पर महिला पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला, राहगीरों ने बचाई जान

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया शहर के मालवीय रोड ओवरब्रिज पर सोमवार को उस समय…

4 days ago

अमेरिकी हमले से भड़का ईरान, जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें

तेहरान/वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर…

4 days ago

अंकित बालियान हत्याकांड: 5 दिन बाद शामली पुलिस का बड़ा एक्शन, एनकाउंटर में सुमित और मोहित ढेर

शामली (राष्ट्र की परम्परा)। हरियाणवी गायक अंकित बालियान हत्याकांड में शामली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई…

4 days ago