Monday, April 20, 2026
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श्रीराम-जानकी मंदिर जीर्णोद्धार का शुभारंभ, भूमि पूजन में उमड़ा जनसैलाब


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सदर तहसील के ग्राम पंचायत दरौली अंतर्गत टोला अजमतपुर में स्थित ऐतिहासिक श्रीराम-जानकी मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य का विधिवत शुभारंभ सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को श्रद्धा, आस्था और उत्साह के माहौल में किया गया। वर्षों से जर्जर हो चुके मंदिर के गर्भगृह के पुनर्निर्माण हेतु वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ भूमि पूजन किया गया। इस पावन अवसर पर गांव में उत्सव जैसा वातावरण देखने को मिला, जहां हर ओर भक्ति और उल्लास की लहर थी।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी और मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाकर पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। ढोल-नगाड़ों की गूंज और “जय श्रीराम” के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गूंजायमान हो उठा। भूमि पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से मंदिर निर्माण की सफलता के लिए प्रार्थना की। उपस्थित लोगों के चेहरों पर आस्था, खुशी और संतोष स्पष्ट रूप से झलक रहा था।
इस धार्मिक आयोजन में रघुवंश सिंह, रामचंद्र यादव, जयराम, राम दुलारे, गोविंद यादव, शंभू जायसवाल, इंदल यादव, राम सजन, रंजित यादव, घनश्याम, रविंदर यादव, मोहन, जोखू प्रजापति, दीनानाथ यादव और हरिलाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने मिलकर इस पुण्य कार्य में अपनी सहभागिता दर्ज कराई और मंदिर के पुनर्निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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मंदिर का इतिहास अत्यंत गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक रहा है। वर्ष 1959 में स्वर्गीय महंत रामजी दास ने भिक्षाटन के माध्यम से इस मंदिर का निर्माण कराया था। उस समय से यह मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हालांकि समय के साथ मंदिर की संरचना कमजोर होती चली गई और भवन जर्जर स्थिति में पहुंच गया, जिससे श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इसी स्थिति को देखते हुए मंदिर के जीर्णोद्धार का निर्णय लिया गया।
वर्तमान में मंदिर की देखरेख महंत उदित दास द्वारा की जा रही है, जो नियमित रूप से पूजा-पाठ, साफ-सफाई और रखरखाव का कार्य संभाल रहे हैं। वहीं, मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प महंत रामजी दास के शिष्य अशोक जायसवाल ने लिया है। उनके प्रयासों और प्रेरणा से गर्भगृह के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो सकी है, जिससे ग्रामीणों में नया उत्साह देखने को मिल रहा है।
मंदिर निर्माण कार्य में गांव के लोगों का सहयोग उल्लेखनीय है। कोई श्रमदान कर रहा है तो कोई आर्थिक सहयोग देकर इस कार्य को आगे बढ़ा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि मंदिर का पुनर्निर्माण न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूती प्रदान करेगा। यह पहल गांव की सामूहिक भावना और आस्था का प्रतीक बनकर उभर रही है।

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ग्रामीणों ने यह भी बताया कि मंदिर के नए स्वरूप में विकसित होने से आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। साथ ही यह मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो सकता है, जिससे आसपास के गांवों के लोगों को भी लाभ होगा और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
मंदिर परिसर में आयोजित इस भूमि पूजन कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक भावनाओं को प्रबल किया, बल्कि सामाजिक एकजुटता का भी संदेश दिया। यह आयोजन गांव की पहचान को नई दिशा देने वाला साबित हो रहा है।

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