संवाददाता ओ पी श्रीवास्तव।
गौतम बुद्ध नगर (राष्ट्र की परम्परा) उत्तर प्रदेश शासन ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के तीन अधिकारियों को जमीन आबंटन के मामले में दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया है जबकि अन्य 11 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भी शीघ्र ही निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में बताया जाता है कि भूमि का अधिग्रहण 1600 वर्ग मीटर किया गया और 8000 वर्ग मीटर भूमि को अवैधानिक तरीके से आबटित कर दिया गया।
इस मामले में माननीय उच्च न्यायालय में शिकायत दर्ज कराये जाने पर न्यायालय द्वारा प्रथमदृष्टया दोषी पाए जाने पर इन भ्रष्ट अफसरो को निलंबित कर दिया गया है। जिससे ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण में हड़कंप मच गया है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार इस मामले में उच्च न्यायालय ने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का जब निर्देश पारित किया तब जाकर के इन तीन बड़े अधिकारियों के खिलाफ आनन फानन में कार्रवाई की गई है तथा इस मामले में 11 अन्य अधिकारी और कर्मचारी जो दोषी पाए गए हैं, उनके खिलाफ भी शीघ्र ही कार्रवाई की जाएगी।
बताते हैं कि यह मामला वर्ष 2008 में सामने आया था। विभागीय सूत्र बताते हैं कि ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के तत्कालीन महाप्रबंधक आर के देव, प्रबंधक कमलेश मणी चौधरी एवं वरिष्ठ ड्राफ्ट्समैन सुरेश कुमार को मुख्य रूप से दोषी पाए जाने पर निलंबित किया गया है ।
इस संबंध में कहा जाता है कि प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल नंदी ने भी माननीय न्यायालय के आदेश की जानकारी होने पर दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की है ।
आरोप है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2008 में पतवारी गांव में भूमि का अधिग्रहण कार्य शुरू किया गया था। प्राधिकरण की योजना एल ओ पी 3 के अंतर्गत पतवारी गांव के खसरा संख्या 1245 में भूखंड नियोजित किए गए थे। वर्ष 2023 में प्राधिकरण में पतवारी गांव की भूमि पर आवासीय प्लाट योजना की शुरुआत की गई थी और पांच आवंटियों को तथा कथित रूप से आबंटन पत्र जारी किया गया था।
बताया जाता है कि ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 2 में अवंटियों को 9000 वर्ग मीटर भूमि का आवंटन कर दिया गया । जबकि इस खसरे की मात्र 1600 वर्ग मीटर भूमि का ही अधिग्रहण किया गया था ।
प्राधिकरण के संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों ने आपसी साठ गांठ तथा बेईमानी के तहत 8000 वर्ग मीटर भूमि जो अर्जित ही नहीं की गई थी उसे लीज बनाकर एक रसूखदार व्यक्ति मनिंदर सिंह नागर तथा चार अन्य व्यक्तियों को अवैधानिक तरीके से आबंटित कर दी थी।
विभागीय सूत्र कहते हैं कि भूमि अधिग्रहण किए बगैर भूमि का आवंटन किए जाने के कारण अवंटियों को कब्जा नहीं मिला तो वे इन भ्रष्ट अफसरो के सिखाने पढ़ाने पर व शह पर उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी थी।
सूत्र यह भी बताते हैं कि सुनवाई के दौरान माननीय उच्च न्यायालय ने सम्यक परिशीलन तथा अवलोकन के उपरांत प्राधिकरण के अधिकारियों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करके उनके विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
यह भी बताते है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित प्राधिकरणों द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार को लेकर कई बार तीखी टिप्पणियां व्यक्त की है। लेकिन उसके बावजूद भी प्राधिकरणो में भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
इस संबंध में प्राधिकरण के सीईओ एवं एसीईओ से वार्ता करने का प्रयास किया गया लेकिन अधिकारियों का फोन नहीं उठा।
✍️ लेखक: संजय पराते सरकार आदिवासी हितों की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन बजट और…
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