लागत बढ़ी, काम रुका: NHAI के बाद यूपी में भी राहत पैकेज की उठी मांग

बिटुमेन की कीमतों में उछाल से ठेकेदार परेशान, यूपी सरकार से राहत पैकेज की मांग तेज


लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेजी का असर अब उत्तर प्रदेश के सड़क निर्माण कार्यों पर भी साफ दिखने लगा है। बिटुमेन (डामर) की दरों में अप्रत्याशित वृद्धि के चलते राज्य के ठेकेदारों ने काम करना मुश्किल बताया है और सरकार से तत्काल राहत की मांग की है। उत्तर प्रदेश ठेकेदार कल्याण समिति ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
समिति के अध्यक्ष शरद कुमार सिंह के नेतृत्व में भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अमेरिका-ईरान तनाव के चलते पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे बिटुमेन की कीमतों में भारी उछाल आया है। सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में उपयोग होने वाले बिटुमेन की दर में प्रति मीट्रिक टन लगभग 30,000 रुपये तक की वृद्धि हो चुकी है। इसका सीधा असर परियोजनाओं की लागत पर पड़ रहा है।
पत्र के अनुसार, पहले से तय दरों पर हुए टेंडर के तहत काम करना अब ठेकेदारों के लिए घाटे का सौदा बन गया है। प्रति किलोमीटर सड़क नवीनीकरण में करीब 1.20 लाख रुपये की अतिरिक्त लागत आ रही है। ऐसे में ठेकेदारों ने स्पष्ट किया है कि पुराने रेट पर काम जारी रखना संभव नहीं है।

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इस बीच, National Highways Authority of India (NHAI) ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए अपने प्रोजेक्ट्स के लिए राहत देने का निर्णय लिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देश पर 8 अप्रैल 2026 को जारी नीति परिपत्र के तहत लागत वृद्धि की भरपाई के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। यह व्यवस्था 1 अप्रैल से 30 जून 2026 तक लागू रहेगी या तब तक जारी रहेगी जब तक वैश्विक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती।
नीति के तहत ईंधन, निर्माण सामग्री और लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि के प्रभाव को कम करने के लिए लागत समायोजन (Cost Escalation Compensation) का प्रावधान किया गया है। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में काम की गति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
ठेकेदार कल्याण समिति ने मांग की है कि राज्य सरकार भी इसी तरह की नीति लागू करे ताकि लोक निर्माण विभाग (PWD) के तहत चल रहे कार्य प्रभावित न हों। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते राहत नहीं दी गई तो विकास कार्यों की गति धीमी पड़ सकती है और परियोजनाएं अधर में लटक सकती हैं।

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समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि ठेकेदार पहले से ही वित्तीय दबाव झेल रहे हैं। समय पर भुगतान में देरी और अब लागत में अचानक वृद्धि ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर ठोस समाधान निकालना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिटुमेन की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले समय में सड़क निर्माण परियोजनाओं की लागत और बढ़ सकती है, जिससे राज्य के बजट पर भी असर पड़ेगा। वहीं, गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि वह विकास कार्यों को बाधित किए बिना ठेकेदारों को राहत कैसे दे। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।

Editor CP pandey

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