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छत्तीसगढ़ में 500 करोड़ रुपये का चिकित्सा आपूर्ति घोटाला उजागर: ईडी की छापेमारी से हड़कंप

दुर्ग (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) छत्तीसगढ़ में चिकित्सा आपूर्ति के नाम पर हुए एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसकी अनुमानित राशि 500 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) की जांच के तहत बुधवार को प्रदेश के कई जिलों में एक साथ छापेमारी कर अहम साक्ष्य जुटाए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रायपुर, दुर्ग और आसपास के क्षेत्रों में सरकारी अधिकारियों, चिकित्सकीय उपकरण व दवाओं की आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों, बिचौलियों और एजेंटों के ठिकानों पर ईडी ने सघन छापेमारी की। बताया जा रहा है कि यह घोटाला कोविड-19 काल से लेकर हाल के वर्षों तक चिकित्सा आपूर्ति और उपकरणों की खरीद-फरोख्त में हुए अनियमितताओं से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले में बड़े स्तर पर फर्जी बिल, बढ़े हुए दरों पर खरीद, बिना आपूर्ति के भुगतान, और आपूर्तिकर्ताओं को अनुचित लाभ पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। ईडी की प्रारंभिक जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि इस पूरे घोटाले से कई प्रभावशाली और रसूखदार व्यक्तियों के तार जुड़े हो सकते हैं, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर भारी रकम अपनी जेब में भरी है।ईडी द्वारा की जा रही छापेमारी के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज़ और संदिग्ध लेन-देन के रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि आपूर्तिकर्ताओं और अधिकारियों के बीच सांठगांठ के चलते राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को नुकसान पहुंचाया गया। इस मामले में फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन ईडी ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में पूछताछ और जांच के बाद कई लोगों पर कानूनी शिकंजा कसा जा सकता है। विपक्षी दलों ने इस घोटाले को लेकर राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो और दोषियों को कठोर सजा दी जाए। इस घोटाले के उजागर होने के बाद प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जनता और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग की है।

(इस मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, “राष्ट्र की परम्परा” आपको हर अपडेट सबसे पहले देता रहेगा।)

Karan Pandey

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