राष्ट्र के निर्माण में शिक्षक की भूमिका

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)

शिक्षक का हर व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान होता है। यह शिक्षक ही किसी साधारण मनुष्य को इंसान बनाता है। शिक्षक का स्थान मानव जीवन में माता-पिता से भी ऊपर है। यही वजह है कि शिक्षक के बारे में जितना कहा जाए उतना ही कम है। भारत में सबसे पहले शिक्षक दिवस 5 सितंबर 1962 को मनाया गया था। डॉ राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के तिरूमनी गांव के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह बचपन से ही किताबें पढ़ने के बहुत शौकीन थे।शिक्षा के प्रसार से ही किसी समाज या किसी देश का निर्माण को सकता है। शिक्षित होना हर व्यक्ति के लिए परम आवश्यक है। शिक्षा मनुष्य को एक बेहतर व्यक्ति बनाती है। और मनुष्य को शिक्षित बना कर उसके भीतर विचारों के प्रवाह को सही दिशा प्रदान करती है लेकिन यह तभी संभव है जब उसे सही शिक्षक मिले जो व्यक्ति को सही दिशा प्रदान कर सके मनुष्य को योग्य बनाने का काम शिक्षक द्वारा ही किया जाता है। शिक्षक व्यक्ति के जीवन में मार्गदर्शक का कार्य करता है। जिस तरह कुम्हार मिट्टी को तराश कर कलाकृति तैयार करने का कार्य करता है। उसी तरह शिक्षक बच्चों में निखार लाते हैं, संवारते हैं। शिक्षक ना सिर्फ हमें शिक्षा देते हैं बल्कि वह हमेशा हमें अच्छा इंसान बनाने की कोशिश करते हैं। उनकी कही बातें ही हमारे जीवन को नई दिशा प्रदान करती हैं। शिक्षक का स्थान माता पिता से भी ऊंचा होता है। माता-पिता जन्म जरूर देते हैं बच्चे को लेकिन एक शिक्षक ही उसके चरित्र को आकार देकर उज्वल भविष्य की नींव तैयार करता है। इसलिए हम चाहें कितने भी बड़े क्यों न होने जाए हमें अपने शिक्षकों को कभी नहीं भूलना चाहिए| शिक्षक ही हमारी प्रेरणा के स्त्रोत हैं जो हमें हमेशा आगे बढ़ने में हमारा मार्गदर्शन करते हैं।

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