Saturday, April 18, 2026
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उपचारात्मक शिक्षण से छात्रों में पैदा होता है शिक्षा के प्रति लगाव- एयआरजी

कुशीनगर(राष्ट्र की परम्परा)
रेमेडिटल टीचिंग यानि उपचारात्मक शिक्षण में शिक्षक, विद्यार्थियों की अधिगम संबंधी त्रुटियों को दूर करके, उनको ज्ञानार्जन की उचित दिशा की ओर मोड़ने का प्रयास करते हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को संबंधित विषय में दक्ष बनाने के साथ उनमें विषय के शिक्षण के प्रति लगाव उत्पन्न करना है 
यह बातें एसआरजी अखिलेश तिवारी ने कही। वह गुरुवार को दुदही विकास खंड के कंपोजिट विद्यालय भगवानपुर में 50 दिनों तक चलने वाले गणित व भाषा विषय के उपचारात्मक शिक्षण का निरीक्षण कर रहे थे।
उन्होने कहा कि गणित के साथ भाषा में शैक्षणिक निदान व उपचार का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसकी उपेक्षा करने से शिक्षा व्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
अध्यापक, विद्यार्थियों के दोषों का ज्ञान प्राप्त करके उन्हें सुधारने के लिए प्रयत्नशील होते हैं व अपने शिक्षण को प्रभावशाली बनाने का प्रयास करते हैं। उन्होने सतत निपुण आंकलन व छात्रों की शत प्रतिशत उपस्थिति सुदृढ़ करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाकर उसका क्रियान्वयन करने व शिक्षक संदर्शिका में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए, शिक्षण कार्य करने का सुझाव दिया। इस दौरान धनन्जय मिश्र, ब्रजेश सिंह, नीतू यादव, अनीता देवी आदि शिक्षक मौजूद रहे।

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