सोमनाथ मिश्र की रिपोर्ट
आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया हमारी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। परिवार हो या दोस्ती, प्रेम संबंध हों या सामाजिक जुड़ाव—हर रिश्ते पर इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है। सवाल यह है कि क्या सोशल मीडिया हमारे रिश्तों को मजबूत कर रहा है या कहीं हम रिश्तों को स्क्रीन की भीड़ में खोते जा रहे हैं?
सोशल मीडिया और रिश्तों का नया समीकरण
तकनीक ने संवाद को तेज़ बनाया है, लेकिन मनों के बीच दूरी भी बढ़ाई है।
आज लोग एक ही छत के नीचे रहते हैं, पर वास्तविक बातचीत पिछड़ रही है। मोबाइल की स्क्रीन पर घंटों स्क्रोल करते हुए परिवारों का साथ कम होता जा रहा है। कहीं पर लाइक और कमेंट रिश्तों की वैल्यू तय करने लगते हैं।
सोशल मीडिया न तो पूरी तरह गलत है और न पूरी तरह सही।
यह हमें जोड़ भी सकता है और दूर भी कर सकता है—निर्णय हमारे हाथों में है।
यदि हम डिजिटल दुनिया को जीवन का सहारा बनाएँ, सहारा नहीं—तो रिश्ते मजबूत रहेंगे। वही स्क्रीन जो दूरी बढ़ाती है, सही उपयोग से नजदीकियाँ भी बढ़ा सकती है।
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