नगरवासियों को भगवान श्रीराम के आदर्शों का मंचन देखने का नहीं मिला अवसर, आयोजन नहीं होने के कारणों पर कमेटी के पक्ष का इंतजार
बलिया (राष्ट्र की परम्परा )
आदर्श नगर पंचायत सिकंदरपुर में दशहरा के पावन पर्व पर इस बार रामलीला का आयोजन नहीं होने से नगरवासियों में निराशा है। वर्षों से चली आ रही रामलीला की परंपरा इस बार टूटने से लोगों के बीच आयोजन नहीं होने को लेकर चर्चा हो रही है। नगरवासी रामलीला कमेटी से इसकी वजह जानना चाहते हैं। सिकंदरपुर में रामलीला का आयोजन धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। हर वर्ष नगरवासी रामलीला के मंचन के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों, मर्यादा, सत्य और धर्म की विजय का संदेश प्राप्त करते रहे हैं। यह आयोजन मनोरंजन के साथ ही नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से परिचित कराने का माध्यम भी रहा है।
ऐसे में दशहरा के अवसर पर रामलीला का मंचन नहीं होने से श्रद्धालुओं और नगरवासियों को निराशा हुई है। लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस बार आयोजन क्यों नहीं हो सका? क्या तैयारियों में कोई कमी रह गई या आर्थिक अथवा व्यवस्थागत कठिनाइयों के कारण आयोजन संभव नहीं हो पाया नगरवासियों का मानना है कि यदि आयोजन में किसी प्रकार की समस्या थी तो आपसी बातचीत और जनसहयोग के माध्यम से उसका समाधान तलाशने का प्रयास किया जा सकता था। हालांकि, रामलीला का आयोजन नहीं होने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में रामलीला कमेटी का पक्ष जानना जरूरी है। रामलीला केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का माध्यम भी है। इसलिए नगरवासियों को उम्मीद है कि संबंधित कमेटी आयोजन नहीं होने के कारणों को स्पष्ट करेगी और भविष्य में इस परंपरा को फिर से नियमित रूप से शुरू करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
अब देखना है कि सिकंदरपुर में वर्षों से चली आ रही रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित जिम्मेदार लोग क्या पहल करते हैं।
