रक्षाबंधन 9 अगस्त 2025:- भारतीय सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक उत्सव और भाई-बहन के अटूट बंधन का प्रतीक

गोंदिया – भारत में वर्ष 1959 में रिलीज हुई हिंदी फीचर फिल्म छोटी बहन का गीत, भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना और 1971 में रिलीज हुई फिल्म बेईमानका गीत ये राखी बंधन है ऐसा, जैसे गीतों को सुने बिना रक्षाबंधन का त्योहार अधूरा सा लगता है। यही कारण है कि हमें पिछले एक सप्ताह से राखी व अन्य बाजारों में रौनक के साथ उपरोक्त दोनों गीतों सहित अनेक रक्षाबंधन के गीत सुनाई दे रहे हैं, जो दशकों पूर्व के हैं परंतु आज भी ध्यान आकर्षित करते हैं, क्योंकि यह रक्षाबंधन त्योहार ही ऐसा है कि भाई बहन की डोर से रिश्तो में अटल मजबूती आ जाती है। भारत विविधताओं का देश है,जहां प्रत्येक क्षेत्र, धर्म और परंपरा में त्योहारों का विशेष स्थान है। इन त्योहारों का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं होता, बल्कि यह समाज में आपसी प्रेम, एकता, सामूहिक चेतना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने का कार्य भी करते हैं। इन्हीं पावन पर्वों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लोकप्रिय त्योहार है “रक्षाबंधन”,जिसे आम भाषा में “राखी” भी कहा जाता है।रक्षाबंधन, भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पवित्र पर्व, इस साल 9 अगस्त 2025 को असाधारण रूप से खास है।
साथियों बात अगर हम इस वर्ष राखी उत्सव की करें तो श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्योहार इस बार 95 साल बाद एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग के साथ आ रहा है, जो इसे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से विशेष बनाता है। सौभाग्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, और श्रवण नक्षत्र का संयोग इस दिन को समृद्धि, सुख, और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक बनाता है। इसके अलावा, इस बार भद्रा का साया भी नहीं रहेगा, जिससे राखी बांधने का समय और भी शुभ हो गया है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र मेरा व्यक्तिगत मानना है कि आज की नई युवा पीढ़ी या नई यंग जनरेशन को हमारे हर भारतीय त्योहारों का महत्व समझाने की अति आवश्यकता है, क्योंकि मैं देख रहा हूं कि युवाओं के हृदय में आज त्योहारों के प्रति वह भाव नहीं दिख रहें हैं जो दशकों पूर्व के युवाओं में देखे थे जो आज बूढ़े हो चुके हैं। यानें वर्तमान डिजिटल युग में हमारे युवा, त्योहारों की मर्यादा व गरिमा को कुछ हद तक भूलते जा रहे हैं, क्योंकि आज जमाना आ गया है सब कुछ ऑनलाइन होता जा रहा है, जबकि मेरा मानना है कि सभी त्योहारों को हमारी भारतीय संस्कृति मुहूर्त बेला से करना चाहिए। वैसे भी इस बार रक्षाबंधन राखी 09 अगस्त 2025 को ही आ रहा है। चूंकि राखी एक ऐसा त्यौहार है जो, दुनियां में जब तक चंदा बादल धरती आकाश रहेगा, भाई बहन का प्यार मौजूद रहेगा व बहन का हमेशा सम्मान व रक्षा का प्रण लेना होगा,चूँकि राखी के खुशी वाले दिन भाई के भर-भर आए नैना,कदर बहन की उनसे पूछो जिनकी नहीं है कोई बहना, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी व स्वयं के विचारों के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, अमर प्रेम है भाई बहन का..यह राखी बंधन है ऐसा….युवाओं को त्योहारों का महत्व समझने की जरूरत है।
साथियों बात अगर हम रक्षाबंधन राखी महोत्सव 09 अगस्त 2025 की करें तो रक्षाबंधन, भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण त्योहार है,जिसे भाई बहन के रिश्ते को मजबूत करने के लिए मनाया जाता है। यह त्योहार हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं, जबकि भाई अपनी बहनों को उपहार देकर उन्हें सुरक्षा का आश्वासन देते हैं।यह एक महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। इसे राखी के नाम से भी जाना जाता है। रक्षाबंधन का अर्थ है रक्षा का बंधन। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं, जिससे भाई अपनी बहनों की सुरक्षा का वचन देते हैं। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के भाव को समर्पित है। रक्षाबंधन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, रक्षाबंधन की शुरुआत भगवान इंद्र की पत्नी शची (इंद्राणी) द्वारा इंद्र की कलाई पर रक्षा धागा बांधने से हुई थी, जिस से इंद्र ने असुरों के खिलाफ युद्ध में विजय प्राप्त की। इसी तरह, महाभारत में भी द्रौपदी द्वारा भगवान कृष्ण को रक्षा सूत्र बांधने की कथा है,जिसके बदले कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई थी।रक्षा बंधन भले ही भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक हो, लेकिन भारत की सांस्कृतिक विविधता ने इस दिन को अनेक रूपों में सजाया है. गायों की पूजा से लेकर समुद्र अर्पण, यज्ञोपवीत से लेकर झूला उत्सव तक सावन पूर्णिमा हर राज्य में अपने मायने रखती है. यह पर्व हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और याद दिलाता है कि भिन्नताओं में ही हमारी एकता छिपी है, सावन की पूर्णिमा सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि भारत की विविध संस्कृति और परंपरा की झलक है. हर राज्य ने इस दिन को अपनी- अपनी मान्यता, आस्था और रीति-रिवाज से सींचा है. यही विविधता भारत की सबसे बड़ी खूबी भी है, जो हर पर्व को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव बना देती है।
साथियों बातें कर हम रक्षाबंधन पर्व के महत्व और परंपराओं की करें तो,रक्षाबंधन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि इसका सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू भी अत्यंत महत्वपूर्ण है:- (1)भाई-बहन के संबंधों का उत्सव: यह त्योहार भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को सशक्त करता है, जो सामाजिक ताने-बाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह पर्व भाई-बहन के बीच विश्वास, समर्थन और प्रेम को उजागर करता है। (2)सामाजिक समरसता का संदेश: रक्षाबंधन जाति, धर्म, वर्ग से ऊपर उठकर मानवीय एकता का संदेश देता है। कई स्थानों पर महिलाएं सैनिकों, नेताओं और समाज के रक्षकों को भी राखी बांधती हैं, जिससे रक्षा का दायरा व्यापक होता है। (3) नारी शक्ति का सम्मान: यह पर्व अप्रत्यक्ष रूप से नारी सम्मान, गरिमा और उसकी सुरक्षा की ओर ध्यान आकर्षित करता है। बहन केवल उपहार पाने वाली नहीं, बल्कि वह समाज की संरक्षिका और मार्गदर्शिका भी होती है,भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रक्षाबंधन को विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है, जो क्षेत्रीय संस्कृति और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करता है:-(1) उत्तरभारत: दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार और मध्यप्रदेश में यह पर्व विशेष रूप से धूमधाम से मनाया जाता है। बहनें घर-घर जाकर भाइयों को राखी बांधती हैं और विशेष पकवान बनते हैं। (2) राजस्थान में लांबा या रक्षा-सूत्र: यहाँ महिलाएं अपने भाइयों केअलावा राज परिवारों या पुजारियों को भी राखी बांधती हैं। लांबा नामक विशेष राखी होती है जो सिरपर बांधी जाती है। (3) महाराष्ट्र में नारली पूर्णिमा: यहाँ मछुआरे समुद्र देवता को नारियल अर्पित करते हैं और अपनी बहनों को राखी बांधते हैं। यह पर्व समुद्र की कृपा और सुरक्षा की कामना से भी जुड़ा है। (4)बंगाल में झूलन पूर्णिमा: यहाँ राधा-कृष्ण की झांकी सजाकर उनकी झूलन यात्रा की जाती है, और साथ ही भाई-बहन भी रक्षाबंधन मनाते हैं। (5) उत्तराखंड, हिमाचल में राखी के साथ लोकगीत: यहाँ पारंपरिक पहाड़ी गीत और लोकनृत्य के साथ रक्षाबंधन को रंगीन बनाया जाता है।
साथियों बातें अगर हम डिजिटल युग में समय के साथ बदलते समय के साथ बदलती परंपरा और आधुनिक परिप्रेक्ष्य में राखी महोत्सव मनाने की करें तोसमय के साथ रक्षाबंधन की परंपराओं में बदलाव भी आया है। आज की आधुनिक पीढ़ी इस पर्व को तकनीकी माध्यमों से भी मना रही है, बहनें वीडियो कॉल के ज़रिए राखी बांधती हैं, डाक या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से राखी भेजती हैं। कई परिवारों में बहनें भाई के स्थान पर अपनी बहनों को भी राखी बांधती हैं, व आजकल भाई के साथ भाभी को एक साथ बैठाकर उनकी आरती उतारकर दोनों को राखी बांधी जाती है, जिससे इस पर्व की व्यापकता और भावना की विशालता सिद्ध होती है।(1)सैन्य बलों को राखी:- देशभर की बहनें सीमाओं पर तैनात भारतीय जवानों को राखी भेजकर उनके त्याग और समर्पण को नमन करती हैं। इससे राखी देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक बन जाती है। (2) विद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं मेंरक्षाबंधन: स्कूलों, कॉलेजों, एनजीओ आदि में यह पर्व सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में मनाया जाता है, जिसमें छात्र-छात्राएं परस्पर राखी बांधकर भाईचारे की भावना को शालीनता से बढ़ावा देते हैं।
साथियों बात कर हम, रक्षाबंधन के पर्व में व्यापारिक और आर्थिक पक्ष के एंगल से देखने की करें तो,रक्षाबंधन केवल एक पारिवारिक पर्व नहीं रहा, यह अब आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो गया है:-मिठाई उद्योग, कपड़े, राखी निर्माण, गिफ्ट आइटम, डाक सेवा, कूरियर कंपनियाँ और ऑनलाइन प्लेटफार्म इस पर्व से भारी लाभ कमाते हैं। राखी की बिक्री में करोड़ों का व्यापार होता है, जिससे कई कुटीर उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलता है, विशेष रूप से महिलाओं द्वारा बनाई गई हस्तशिल्प राखियाँ को बहुत महत्व मिलता है और बहुत सी महिलाओं के रोजगार का साधन हो गया हुआ वर्ष भर राखियां बनती है व एक महीने के अंदर उनकी पूरी आंखें बिक जाती है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे किरक्षाबंधन 9 अगस्त 2025:-भारतीय सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक उत्सव और भाई-बहन के अटूट बंधन का प्रतीक”रक्षाबंधन” यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते का प्रतीक है-युवाओं को त्योहारों का महत्व समझाने की ज़रूरत।आज खुशी के दिन भाई के भर भर आए नैना,कदर बहन की उनसे पूछो जिनकी नहीं है बहना,रक्षाबंधन की बधाईयां।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

Editor CP pandey

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