कदम कदम पर ठोस सुरक्षा हित,
यद्यपि अनेक प्रयत्न किये जाते हैं,
पर बिकने वाले तो बिक जाते हैं,
प्रश्न पत्र सार्वजनिक हो जाते हैं।
भारत में जब पीएम सीएम मंत्री
तक नहीं सुरक्षित रहने पाते हैं,
प्रश्नपत्र तो कागज के पन्ने हैं,
विक्रेता ख़रीददार मिल जाते हैं।
विद्यार्थी तो मेहनत से पढ़ते हैं,
पढ़कर ही परीक्षा देना चाहते हैं,
प्रश्न पत्र बनाने वाले भी अक्सर,
ईमानदारी के साथ पेपर बनाते हैं।
निजी स्वार्थ में ही भविष्य लाखों,
लाख होनहार देश के युवाओं का
हर साल ऐसे ही बरबाद कर देते हैं,
हम सब समाज वाले बिके हुये हैं।
आदित्य ईमानदारी सच्चाई व
वफ़ादारी के ढोल पीटे जाते हैं,
अपना स्वार्थ जब सामने होता है,
सामाजिक प्राणी बन बिक जाते हैं।
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