धान की फसल में खरपतवार, खैरा, सफेदा एवं झोंका रोग से बचाव

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ मेनका ने बताया कि धान की रोपाई के पश्चात खरपतवार एक मुख्य समस्या होती है इसके नियंत्रण हेतु रसायनिक विधियो का प्रयोग तुलनात्मक दृष्टि से कम खर्चीला होता है। रोपाइ के पश्चात दो से तीन दिन के अन्दर दो इन्च भरे पानी में ब्यूटाक्लोर 50 प्रतिशत ई०सी० 1.6 ली० अथवा प्रिटेलाक्लोर 50 प्रतिशत इ०सी० की 400 से 600 मि०ली० को 100 से 120 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करे। यदि उक्त रसायन के स्प्रे के पश्चात भी खरपतवार का नियत्रण नहीं होता है तो रोपाई के 15 से 20 दिन बाद विस्पायरीबैक सोडियम 10 प्रतिशत एस०सी० की 80 से 100 ग्राम मात्रा को 120 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में खैरा, सफेदा एवं झोंका रोग से प्रभावित होने की सम्भावना बनी हुई है। रोग से बचाव हेतु कृषक भाइयों को निम्न सुझाव दिये जाते हैः- चार से पाँच ग्राम प्रति ली० की दर से ट्राइकोडर्मा का एक छिड़काव नर्सरी लगने के 10 दिन के अन्दर कर देना चाहिये। बुआई के 14-15 दिन बाद एक सुरक्षात्मक छिड़काव रोगों तथा कीटों के बचाव हेतु करें। खैरा रोग के लिये एक सुरक्षात्मक छिड़काव 5 किग्रा० जिंक सल्फेट का 20 किग्रा० यूरिया या 25 किग्रा बुझे हुये चूने के साथ 1000 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से पहला छिडकाव तथा दूसरा छिड़काव पहले छिड़काव से 10 से 15 दिन के बाद करना चाहिये। सफेदा रोग के नियंत्रण हेतु 4 किग्रा. फेरस सल्फेट तथा 20 किग्रा० यूरिया को 1000 ली० पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करना चाहिये। झोंका रोग की रोकथाम के लिये 100-200 ग्राम कार्बण्डाजिम 50 प्रति० डब्लू०पी० का 300-350 ली० पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें तथा भूरा धब्बा रोग से बचने के लिये 2 किलोग्राम जिंक मैगनीज कार्यामेट का 700-750 ली० पानी मे मिलाकर प्रति हे० की दर से छिड़काव करे। धान में लगने वाले कीटो से बचाव हेतु 300 से 320 मिली. व्युप्रोफेजिन 25 प्रतिशत एस.सी. 160 से 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। फसलो में लगने वाले कीट/रोग एवं खरपतवार की समस्या के निवरण हेतु किसान साथी वाट्सएप न०- 9452247111 अथवा 9452257111 पर प्रभावित पौधों की फोटो सहित अपनी समस्या और पूरा पता लिखकर प्रेषित करें। समस्या का निराकरण 48 घंटे में किसान के मोबाइल पर कर दिया l

Karan Pandey

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