कृष्ण-राधा बने बच्चे: जो है अलबेला, मद नयनों वाला…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। आनंद और उल्लास में डूबे भक्त, भूख प्यास को भूलकर अपने आराध्य के जन्म की प्रतीक्षा में सोमवार मध्यरात्रि को घड़ी की टिक-टिक करती सुइयों को व्याकुलता से निहार रहे थे। मध्यरात्रि 12:00 बजे घड़ी की दोनों सुइयों का संगम होते ही भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी में कान्हा के जन्म का उद्घोष हो गया।
जिले मे नटवर नागर गोविंदा के जन्मोत्सव के लाखों श्रद्धालु साक्षी बने। अजन्मे के जन्म पर मंत्रोच्चारण के बीच शंखनाद हुआ तो लता-पता भी झूम उठी।
शहर से गांव तक सजे देवकीनंदन के आगमन से बधाई गीतों से वातावरण भक्तिमय हो गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने नन्हे मुन्ने बच्चों को भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप भी में सजाया।
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