“मां का सम्मान उसकी ममता की पहचान है मातृ दिवस पर दिल यह कहे मां ईश्वर के समान है”
मातृ दिवस,मां के अपार प्रेम ममता भावना और त्याग को सम्मान देने का दिन है मां जन्म देती है दर्द सहकर खुद को मौत के मुंह में डालकर बच्चे को इस दुनिया में लाती है उसका पालन पोषण करती है मां वात्सल्य की मूर्ति है बिना शर्त प्यार करती है। जो अपने बच्चों के लिए बिना स्वार्थ सब कुछ न्योछावर कर देती है। बच्चा बीमार हो तो अपनी रातों की नींद का त्याग कर जागती है। मां एक ऐसा शब्द है जो दिल को छू जाता है मां शब्द ऐसा जादू है जो मन में समा जाता है मां अपने मुस्कान प्यार लोरी से बच्चे के हर दुख को दूर करती है। मांगने पर जहां सारी मन्नत पूरी होती है मां के पैरों में ही तो जन्नत होती है मां का महत्व जीवन में अनमोल है क्योंकि वह पहली गुरु है सबसे अच्छी दोस्त है एक रक्षक होती है मां पूरे घर की नींव होती है परिवार एवं समाज की रीढ़ की हड्डी होती है।मां सबसे पहले उठती है पति को नाश्ता बच्चों को टिफिन सास ससुर की दवाई कपड़े धोना बच्चों को स्कूल छोड़ने एवं लेने जाना रात को सबसे बाद में सोना आजकल मां घर और नौकरी दोनों संभालती है क्या कभी बच्चों ने मां के चेहरे की उदासी देखी? क्या कभी बच्चों ने पूछा मां खाना खाया कि नहीं?
माँ अपने बच्चों परिवार के लिये अपनी इच्छाएं, स्वास्थ्य को अनदेखा करती है।बच्चों के पूरे काम खुद करती है जिससे बच्चे अपने दायित्वों से दूर हो जाते है। बाद में जब माँ तकलीफ मे होती है बच्चे उसकी परवाह नही करते। बड़े होकर बच्चे अपनी जिंदगी में व्यस्त हो जाते है। इसलिये मैं पूजनीय सम्माननीय माताओं से कहना चाहूंगी कि Health is Wealth बचपन में आपके जो शौक रहे हो उसे कभी मत छोड़िए छोटे-मोटे कामों में बच्चों की सहायता लीजिए।उनको आत्मनिर्भर और जिम्मेदार बनाये। बच्चों के साथ समय बिताए।उनको अपने साथ काम कराए। जिससे वो आपके एक अच्छे दोस्त बनेंगे।और भविष्य के एक अच्छे जिम्मेदार इंसान भी।
“उम्र बढ़ने की बजाय घट जाती तो क्या बात थी
जिंदगी मां की गोद में कट जाती तो क्या बात थी।”
सरकार ने मातायों के लिए अनेक कदम उठाए हैं मातृत्व अवकाश 26 सप्ताह अर्थात 6:30 महीने का दिया गया है मातृ वंदना योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को प्रोत्साहन राशि दी गई है मां महिम भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ने कहा है “हर मां में नेतृत्व एवं मातृत्व दोनों विशेषताएं होती हैं मातृत्व एवं नेतृत्व दोनों एक ही ताल में चलती हैं क्योंकि नेतृत्व मां की सहृदय प्रवृत्ति है” मां वह है जो हर किसी का स्थान ले सकती है लेकिन मां का स्थान कोई नहीं ले सकता मां का नाम प्रथम लिया जाता है क्योंकि वह जन्मदातरी है पालन हारी है पूजनीय है, सहनशीलता की मूर्ति है।यदि संसार में मां ना होती तो मनुष्य नाम की कोई चीज नहीं होती इसलिये वाल्मीकि रामायण में भी महाऋषि बाल्मीकि जी के भी माँ को स्वर्ग से महान बताया है “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी”
“माँ शक्ति माँ काशी है माँ कवच है माँ चारों धाम है माँ चिंता है याद है जिंदगी का सार है।”
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