Saturday, April 25, 2026
HomeUncategorizedबदलेगा पूर्वांचल का पोल्ट्री परिदृश्य

बदलेगा पूर्वांचल का पोल्ट्री परिदृश्य

चूजों की सप्लाई में आत्मनिर्भरता की ओर पूर्वांचल, बलिया से शुरू हुई बड़ी पहल

घनश्याम तिवारी की कलम से


बलिया (राष्ट्र की परम्परा )। पूर्वांचल अब पोल्ट्री सेक्टर में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। जनपद के रेवती ब्लॉक स्थित छोटकी बेलहरी गांव में स्थापित ब्रायलर पेरेंट लेयर फार्म पूर्वांचल के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बनकर सामने आया है। यह फार्म न केवल पूर्वांचल का पहला, बल्कि उत्तर प्रदेश का दूसरा आधुनिक ब्रायलर पेरेंट लेयर फार्म है, जो बड़े पैमाने पर चूजों की सप्लाई की क्षमता रखता है।
इस फार्म में वर्तमान में लगभग 13 हजार पेरेंट (प्रजनक) मुर्गियों का वैज्ञानिक तरीके से पालन किया जा रहा है। इनसे हर महीने करीब 10 लाख उच्च गुणवत्ता वाले ब्रायलर चूजों के उत्पादन की क्षमता विकसित की जा रही है। अभी शुरुआती चरण में ही बलिया और आजमगढ़ जनपदों के पोल्ट्री किसानों को चूजों की आपूर्ति शुरू हो चुकी है।

ये भी पढ़ें – विकास के वादे और हकीकत: बरहज में बस स्टेशन अब भी सपना

दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी खत्म
अब तक उत्तर प्रदेश में ब्रायलर चूजों की मांग को पूरा करने के लिए हरियाणा, दिल्ली और अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार केवल आजमगढ़ मंडल के तीन जिलों—आजमगढ़, बलिया और मऊ—में हर महीने लगभग 33 लाख चूजों की आवश्यकता होती है।
आजमगढ़ में करीब 20 लाख
बलिया में 5 लाख
मऊ में लगभग 1 लाख चूजों की मासिक मांग है
ब्रायलर पेरेंट लेयर फार्म पूर्वांचल की स्थापना से यह निर्भरता अब धीरे-धीरे खत्म होने जा रही है। फार्म के पूरी क्षमता पर संचालित होने के बाद मऊ, गाजीपुर, वाराणसी, चंदौली, भदोही, जौनपुर, मिर्जापुर और सोनभद्र जैसे जिलों में भी चूजों की नियमित आपूर्ति संभव होगी।
कांट्रेक्ट फार्मिंग को मिलेगा बढ़ावा
आजमगढ़ मंडल में कांट्रेक्ट फार्मिंग के तहत करीब छह लाख ब्रायलर पक्षियों का पालन किया जा रहा है। इसके लिए अब तक लगभग चार लाख चूजे हर महीने गोरखपुर स्थित हैचरी से मंगाए जाते थे। अब वही आपूर्ति बलिया के छोटकी बेलहरी स्थित ब्रायलर पेरेंट लेयर फार्म पूर्वांचल से होने लगी है, जिससे लागत कम होगी और समय की बचत भी होगी।
आधुनिक तकनीक से हो रहा पालन
पेरेंट लेयर फार्म में नर और मादा प्रजनक मुर्गियों का वैज्ञानिक विधि से पालन किया जाता है, ताकि उच्च गुणवत्ता वाले निषेचित अंडे (फर्टाइल एग) प्राप्त किए जा सकें। इन्हीं अंडों से हैचरी में ब्रायलर चूजे निकलते हैं, जिन्हें आगे मांस उत्पादन के लिए पाला जाता है।
फार्म पर बायो-सिक्योरिटी, संतुलित पोषण, तापमान नियंत्रण और स्वास्थ्य निगरानी जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
रोजगार के नए अवसर
इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खुले हैं। फार्म के संचालन से लगभग 15 लोगों को स्थायी और 20 लोगों को अस्थायी रोजगार मिला है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट, फीड सप्लाई, हैचरी और पोल्ट्री फार्मिंग से जुड़े सेक्टरों में अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों लोगों को काम मिलने की संभावना है।
अधिकारियों की निगरानी में संचालन
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.के. मिश्र के अनुसार ब्रायलर पेरेंट लेयर फार्म पूर्वांचल की नियमित निगरानी की जा रही है। नर-मादा मुर्गियों के स्वास्थ्य, टीकाकरण और प्रबंधन को लेकर समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है। लक्ष्य है कि वर्ष के अंत तक पूरे पूर्वांचल में चूजों की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित की जाए।
फार्म संचालक पंकज पांडेय ने बताया कि इकाई का विस्तार कार्य प्रगति पर है और आने वाले समय में उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ाई जाएगी।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments