July 25, 2024

राष्ट्र की परम्परा

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पोलियो की दवा सुरक्षित और असरदार

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) 18 सितम्बर…

पल्स पोलियो की दवा सुरक्षित और असरदार है । इसके प्रति मिथक और भ्रांतियों के कारण पड़ोसी देश पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पोलियो का उन्मूलन नहीं हो सका, जबकि भारत में पोलियो उन्मूलन संभव हो गया । चूंकि पड़ोसी देशों में पोलियो के वायरस मौजूद हैं, जबकि डब्लूएचओ ने भारत को पोलियो मुक्त किया है| इस लिए एहतियातन भारत के भी हर शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चे को पोलियो से पूर्ण प्रतिरक्षित किया जाना अनिवार्य है । इसलिए प्रत्येक अभिभावक का दायित्व है कि वह अपने पाल्यों को पोलियो की दवा अवश्य पिलाएं।

👉सीडीओ ने रविन्द्र कुमार ने एमसीएच विंग से किया पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ

उक्त बातें सीडीओ रविंद्र कुमार ने एमसीएच विंग से पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ करते हुएबच्चों को पोलियो खुराक देने के दौरान कही। उन्होंने बताया कि 19 से 23 सितंबर तक घर-घर जाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम पोलियो की दवा पिलाएंगी ।
सीडीओ ने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए दिये गये दिशा-निर्देशों के अनुसार स्कूलों में बूथ दिवस पर रैलियां निकाली गयी हैं और पल्स पोलियो अभियान के प्रति जागरूकता के संदेश दिये गये । आईसीडीएस विभाग से कहा गया है कि आंगनबाड़ी केंद्रों के तीन से पांच वर्ष तक के बच्चों को केंद्र पर दवा पिलवाएं, जबकि तीन वर्ष से कम आयु के बच्चों के माताओं को प्रेरित कर दवा पिलाई जाए। राजस्व विभाग, आपूर्ति विभाग, पंचायती राज विभाग और नगर निकाय से जुड़े लोगों से इंकारी परिवारों को प्रेरित कर उनके बच्चों को पोलियों की दवा पिलवाने को कहा गया है ।

👉आज से घर-घर जाकर पोलियो की दवा पिलाएंगी पल्स पोलियो की टीम

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने बताया कि पोलियो का टीका नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में भी शामिल है । पल्स पोलियो का ड्रॉप जन्म के समय ही दिया जाता है। इसके अलावा छह, दस और चौदह सप्ताह पर भी यह ड्रॉप पिलाया जाता है । इसकी बूस्टर खुराक सोलह से चौबीस महीने की आयु में भी दी जाती है । भारत सरकार के नेशनल हेल्थ पोर्टल पर 23 अक्टूबर 2018 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक पोलियो के दो सौ संक्रमणों में से एक संक्रमण अपरिवर्तनीय पक्षाघात (आमतौर पर पैरों में) में बदल जाता है। ऐसे पक्षाघात पीड़ित में से पांच से दस फीसदी की मौत हो जाती है । ऐसे में इस जटिल बीमारी के प्रति संपूर्ण प्रतिरक्षण अति आवश्यक है ।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि जिले में रविवार को आयोजित बूथ दिवस पर पहले दिन 1759 बूथों पर दवा पिलाई गई | सोमवार से घर-घर भ्रमण के लिए 944 टीम बनाई गई हैं। 114 ट्रांसिट टीम और 45 मोबाइल टीम भी बनाई गई हैं जो ईंट भट्ठों, घूमंतू लोगों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर पोलियों की दवा पिलाएंगी।
उद्घाटन अवसर पर डीपीओ कृष्णकांत राय, एसीएमओ डॉ. विनय प्रकाश पाण्डेय, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) एसएमओ डॉ. अंकुर सांगवान, यूनिसेफ डीएमसी गुलजार त्यागी, डॉ. बिपिन रंजन, एआरओ राकेश चंद, मुकेश मिश्रा मौजूद रहे ।

👉स्वस्थ है शिशिर के दोनों बच्चे

परासिया निवासी शिशिर का सरकारी टीकों में पूर्ण विश्वास है। उनका बड़ी बेटी सोना पांच साल है जबकि छोटा बेटा दो साल का है । उनका कहना है कि उन्होंने अपने दोनों बच्चों को पोलियो की सभी ड्रॉप पिलवाई है और सभी प्रकार के टीके सरकारी टीकाकरण केंद्र से ही लगवाए हैं। इससे उनके दोनों बच्चे स्वस्थ हैं । पोलियो के ड्रॉप के कारण कभी भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। टीका लगने के बाद बुखार आता है जो सामान्य प्रभाव है। बच्चों को बुखार की दवा दी जाती है और वह ठीक हो जाते हैं। सभी लोगों को अपने बच्चों को पोलियो की दवा अवश्य पिलानी चाहिए और नियमित टीकाकरण भी कराना चाहिए|

संवादाता देवरिया…