मनरेगा की विसंगतियों पर पंचायतों का हल्ला बोल, जेल में बंद साथियों की रिहाई की मांग

उतरौला/बलरामपुर (राष्ट्र की परम्परा)। सोमवार को
ग्राम प्रधान,ग्रामपंचायत सचिव अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी ग्राम रोजगार सेवक तकनीकी सहायक संघ संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश ने प्रधान संघ अध्यक्ष ज्ञानेंद्र वर्मा के नेतृत्व में
जिलाधिकारी बलरामपुर को संबोधित एक ज्ञापन खंड विकास अधिकारी उतरौला को सौंपा। दिए गए पत्र में कहा है कि विकास खण्ड पचपेड़वा, ग्राम पंचायत विशुनपुर टनटनवा में मनरेगा योजनान्तर्गत निर्मित 03 तालाब के सापेक्ष की गई जांच में दोषी पाये गये ग्राम प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक, जे०ई०, ए०पी०ओ० के विरुद्ध जिला प्रशासन के निर्देश पर खण्ड विकास अधिकारी , पचपेड़वा द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करायी गई। जिसके क्रम में सभी लोग जेल गये किन्तु मनरेगा अन्तर्गत उस तालाब पर लगभग 38 लाख रूपये के भुगतान पर तत्कालीन खण्ड विकास अधिकारी धनन्जय सिंह को जिला प्रशासन द्वारा बचा लिया गया जबकि भुगतान तत्कालीन खण्ड विकास अधिकारी धनन्जय सिंह के डोंगल द्वारा किया गया। इनके खिलाफ कोई कार्यवाही जिला प्रशासन द्वारा नहीं किया गया। तत्कालीन खण्ड विकास अधिकारी के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट जिला प्रशासन द्वारा अविलम्ब दर्ज कराया जाये। ग्राम पंचायत बैजपुर विकास खण्ड बलरामपुर में पंचायत भवन निर्माण कार्य में हुई अनियमितता पर दोषियों के विरुद्ध सीधे एफ०आई०आर० दर्ज करा दिया गया जबकि दुरूपयोग की गई धनराशि की वसूली दोषी कर्मचारियों/ प्रधान से सीधे या उनके वेतन से की जा सकती थी। इसी क्रम में दिनांक 27.06.2025 को विभागीय अधिकारियों के अभियोजन स्वीकृत के बगैर महिला कर्मचारी आरती रावत जिसके गोद में 04 माह की बच्ची है एवं ग्राम प्रधानं अरुण सिंह को अमानवीय तरीके से पुलिस प्रशासन द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, पुलिस प्रशासन द्वारा किया गया उक्त कृत्य घोर निंदनीय है। यदि जिला प्रशासन में मानवीय संवेदना होती तो उस महिला कर्मचारी को जेल जाने से बचाया जा सकता था, क्योंकि कारागार में निरुद्ध करने जैसा गम्भीर अपराध उनके द्वारा नहीं किया गया था। अतः तत्काल एफ०आई०आर० वापस लेकर उपरोक्त की रिहाई करायी जाये। जिले के अधिकांश ग्रामों में जल जीवन मिशन योजना के अन्तर्गत पाईप लाईन डालने एवं गांव में खोदी गई सड़कों का मरम्मत नहीं हुआ है एवं विकास खण्ड बलरामपुर के ग्राम पंचायत चूल्हाभारी में पानी की टंकी फट गई थी (प्रशासन द्वारा एफ०आई०आर० की कोई कार्यवाही नहीं की गई), गलियां खोदी पड़ी है, ग्रामीण दुर्घटना के शिकार हो रहे है। कम्पनी व ठेकेदार मरम्मत का कार्य नहीं कर रहें है। जिनके विरुद्ध एफ०आई०आर० दर्ज कराई जावे, जिला प्रशासन द्वारा उपरोक्त पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना में 252 रूपये की मजदूरी होने के कारण मजदूर कार्य करने को तैयार नहीं है, इस कारण हम सभी काफी परेशान है तथा हम सभी से अनुचित शोषण व धन मांग न पूरी कर पाने के कारण अधिकारियों द्वारा परेशान एवं प्रताड़ित करने के कारण मनरेगा का कार्य नहीं करेंगे एवं वर्तमान में समस्त कार्य बन्द रखेंगे। ग्राम पंचायतों द्वारा प्रत्येक वर्ष शासन द्वारा सौंपे गये लक्ष्य अनुसार वृक्षारोपण किया जाता है, वृक्षारोपण के पश्चात कई कारणों से पेड़ों की सुरक्षा न होने के कारण अधिकांश पेड़ नष्ट हो जाते है हम सब आशंकित है कि भविष्य में पेड़ों की जांच के नाम पर हम लोगों के विरुद्ध उपरोक्तानुसार उत्पीड़न की कार्यवाही की सम्भावना है, इस कारण हम लोग वृक्षारोपण का कार्य नहीं करेंगे। ग्राम पंचायतों को प्रायः अधिकारियों द्वारा परेशान किये जाने के कारण तथा ग्राम प्रधान व सचिव सहित अन्य कर्मचारियों को दुर्दान्त अपराधी की तरह अपमानित करके जेल भेजे जाने के कारण कारागार में निरुद्ध व्यक्तियों के रिहाई तक हम सभी कोई कार्य नहीं करेंगे। शासन के आदेश सं0-1350/48/07.02.2022-296/ मनरेगा 2013 दिनांक 22. 08.2022 में बिन्दु सं0-3 के पैरा तीन में मनरेगा हेतु हेतु ग्राम पंचायतों को दिये गये समस्त अधिकार को जानबूझकर भ्रष्टाचार के उद्देश्य से लागू न करने से प्रायः ग्राम पंचायत में मनरेगा की विसंगतियां उत्पन्न होती है, तत्काल उक्त शासनादेश को लागू किया जाये, अन्यथा की दशा में ग्राम पंचायतों पर कोई कार्यवाही न की जाये।मनरेगा एक मांग आधारित योजना है। जनपद एवं विकास खण्ड अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न एवं शोषण के उद्देश्य से जबरदस्ती लक्ष्य आधारित योजना बना दिया गया है, जोकि मनरेगा एक्ट का उल्लंघन है एवं मनरेगा में जबरदस्ती कार्य का दबाव रोका जाये। प्रत्येक माह सी०एम० डैसबोर्ड के रैंकिंग के नाम पर अधिकारियों द्वारा शासन को गुमराह करने हेतु जबरन भुगतान करने एवं अन्य फर्जी तरीके से रिपोर्टिंग करने का दबाव बनाया जाता है, जिससे शासन के समक्ष सही स्थिति प्रस्तुत नहीं हो पाती है एवं नियमों के उल्लंघन की सम्भावना बनी रहती है। अतः रैंकिंग के नाम पर दबाव बनाया जाना बन्द किया जाये विभिन्न शासकीय योजनाओं में उच्चाधिकारियों द्वारा बिना भू-प्रबन्ध समिति का प्रस्ताव कराये तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृति कराये बिना ही जल्दबाजी में कार्य प्रारम्भ करने का दबाव बनाया जाता है। जिससे बाद में इन्ही बिन्दुओं को आधार बनाकर विभिन्न प्रकार से उत्पीड़न किया जाता है। उपरोक्त कार्य प्रणाली पर तत्काल रोक लगाई जाये। उन्होंने मांग की है कि उपरोक्त समस्याओं का निराकरण किया जाये एवं कारागार में निरुद्ध ग्राम प्रधानों एवं समस्त कर्मचारियों की रिहाई करायी जाये, अन्यथा की दशा में उपरोक्त समस्त समस्याओं के निराकरण न होने तक हम सभी अनिश्चितकालीन कार्य वहिष्कार पर रहेंगे।इस मौके पर योगेंद्र वर्मा,प्रधान बहलोल नियाजी, कर्ताराम यादव,विजय पाल वर्मा, अवकात अली,विमल वर्मा,गुलाबचंद , राधे श्याम,मोहम्मद मुबारक,नाजिया,पार्वती,बिंदु देवी, लक्ष्मी ,आदि प्रधान मौजूद रहे।

Karan Pandey

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