हमारे शब्द और सोच

हमारे शब्द और हमारी सोच दोनो
ही अत्यंत संवेदनशील होते हैं,
कभी इनसे नज़दीकियाँ बढ़ती हैं,
तो कभी हमारी दूरियाँ बढ़ा देते हैं।

इसीलिये कहते हैं तोल मोल के बोल,
क्योंकि अपने ही शब्द और अपनी
ही सोच, कभी हम समझ नहीं पाते हैं,
और न कभी औरों को समझा पाते हैं।

कहने या करने में ग़लतियाँ होती हैं,
तब क्षमा प्रार्थना भी कर ली जाती है,
पर विश्वास टूट जाने पर न क्षमा काम
करती है और ना ही क्षमा दी जाती है।

ग़लतियाँ करना स्वाभाविक होता है,
पर विश्वास जानकर तोड़ा जाता है,
इसीलिए गलती क्षमा कर दी जाती है,
विश्वास टूटा तो क्षमा नही मिलती है।

विश्वास बातों से नहीं भावनाओं को
समझने से आपस में पैदा होता है,
दर्पण की क़ीमत हीरे से कम होती है,
पर हीरे पहने दर्पण हमें दिखाता है।

अमीर वो इंसान नहीं होते हैं
जिनके घर दौलत होती है,
अमीर वो होते हैं जिनके घर
हँसते बेटे, बहू और बेटी हैं।

ख़ुशियाँ मिले न खेत में,
ना ही हाट बाज़ार,
आदित्य अन्दर खोज ले,
भरा पड़ा आगार।

डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’

Editor CP pandey

Recent Posts

देवरिया की पूर्व DM दिव्या मित्तल का इस्तीफा, 13 साल की सेवा को कहा अलविदा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया की पूर्व जिलाधिकारी और 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या…

15 hours ago

पुलिस ने कांग्रेस प्रवक्ता को किया हाउस अरेस्ट, मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने की थी तैयारी

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। बरहज विधानसभा क्षेत्र के विकास, बदहाल मोहन सेतु, सोनूघाट से बरहज…

16 hours ago

चार महीने पहले मिली थी थाने की कमान, अब थानेदार सूर्यप्रकाश सिंह की मौत से सन्नाटा

बस्ती (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में वाल्टरगंज थाना प्रभारी सूर्यप्रकाश सिंह…

1 day ago

कड़वाहट के बीच संवाद

रिश्तों में रूठापन हो,बातों में तल्ख़ी आती है,दिल के किसी कोने मेंमिलने की आस जगाती…

1 day ago

नेपाल सैलाब के बाद नहीं थम रहे आंसू, मलबे से उठ रही दुर्गंध; अपनों की तलाश में भटक रहे परिवार

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और सैलाब के बाद तबाही का मंजर…

1 day ago

प्याज-चीनी की महंगाई से बढ़ी रसोई की चिंता, क्या बफर स्टॉक बनेगा किसान-उपभोक्ता संतुलन का समाधान?

रसोई में महंगाई का तड़का: प्याज 70 रुपये पार, चीनी की तेजी ने बढ़ाई चिंता;…

2 days ago