पर्यावरण संकट के खिलाफ सड़क पर उतरे संगठन, मानव श्रृंखला बनाकर जताया विरोध

हिमालय–अरावली बचाओ अभियान: रांची में वामपंथी संगठनों ने बनाई मानव श्रृंखला, सुप्रीम कोर्ट की नई परिभाषा का विरोध

रांची (राष्ट्र की परम्परा)।देश के पर्वतीय और वन क्षेत्रों को बचाने की मांग को लेकर रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर सोमवार को वामपंथी संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। भाकपा (माले), झारखंड जनाधिकार महासभा, आइसा, ऐपवा, आदिवासी संघर्ष मोर्चा समेत कई सामाजिक संगठनों ने “अरावली बचाओ, हिमालय बचाओ, पर्यावरण बचाओ” के नारों के साथ मानव श्रृंखला बनाकर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट की हालिया सिफारिशों का विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली पर्वतमाला को केवल 100 मीटर ऊंचाई के आधार पर परिभाषित करने से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा है। संगठनों का कहना है कि इस नई परिभाषा से 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों पर खनन और बड़े निर्माण कार्यों के लिए रास्ता खुल जाएगा, जिससे जल, जंगल और जमीन पर सीधा हमला होगा।

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नेताओं ने कहा कि अरावली और हिमालय केवल पहाड़ नहीं, बल्कि देश की जलवायु संतुलन की रीढ़ हैं। इन क्षेत्रों में खनन, जंगलों की कटाई और औद्योगिक परियोजनाओं से न सिर्फ स्थानीय आदिवासी समुदायों की आजीविका प्रभावित होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी गंभीर संकट पैदा होगा। वक्ताओं ने दिल्ली जैसे महानगरों में बढ़ते प्रदूषण का हवाला देते हुए कहा कि जंगलों के विनाश का सीधा असर देशभर में महसूस किया जा रहा है।

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प्रदर्शन के दौरान झारखंड के बड़कागांव से लेकर सारंडा तक हो रही जंगल कटाई का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार पूंजीपतियों के हित में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि नीतियों में बदलाव नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा और सड़कों पर उतरकर जनआंदोलन तेज किया जाएगा।
इस मौके पर मनोज भक्त, सिवेंदु सेन, नंदिता भट्टाचार्य, आरएन सिंह, अलमा खलखो, एती तिर्की, एलिना होरो सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक मौजूद रहे।

Editor CP pandey

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