सरयू नदी में अवैध खनन पर हाईकोर्ट की रोक का एक वर्ष पूर्ण

भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
देवरिया जिले में सरयू नदी के कटान को देखते हुए वर्ष 2007 में कपरवार से भागलपुर तक  सरकार ने डेंजर जोन घोषित किया था। तब से आज तक तटवर्ती क्षेत्र में किसी भी प्रकार के खनन पर रोक लगी थी । लेकिन कुछ समय बाद मेहियवाँ कटान स्थल के आगे डेंजर जोन में अधिकारियों ने मोटी रकम लेकर खेत से सिल्ट हटाने के नाम पट्टा जारी कर दिया । खेत से सिल्ट हटाने के नाम पर सरयू नदी के पेट से खनन माफिया पोकलैण्ड व जेसीबी मशीन से रात दिन बडे पैमाने पर बालू का खनन किया जा रहा था । यह स्थानीय तहसील प्रशासन के आँख में धूल झोंकने का कार्य हो रहा था। जिस जमीन में सिल्ट हटाने के नाम पर पट्टा दिया गया उसका तो पता नहीं लेकिन आस-पास के किसानों  के  खेत से बडे पैमाने पर बालू का खनन कर बालू का खदान बना दिया गया । पोकलैण्ड और जेसीबी मशीन से खनन कर रात दिन ट्रको से बालू की तस्करी हो रही थी।  सूत्रों की मानें तो इस कार्य में खनन अधिकरियों से लेकर सफेद पोश भी संलिप्त थे और सबका हिस्सा तय था ।
राजनैतिक व प्रशासिनक संरक्षण होने के चलते कोई जिम्मेदार अधिकारी हस्तक्षेप नही कर रहा था और न ही कोई मौके पर देखने जा रहा था कि परमिशन क्या है और क्या हो रहा है। सरयू नदी से बालू खनन का ही देन थी कि 307 घर का आबाद गाँव कूरह परसिया व संगम तट के मुहाने पर बसा गाँव कोल खास गाँव नदी में विलीन हो गये। कटईलवा गाँव कटान की मुहाने पर खडा था। कटान को रोकने के लिए कपरवार संगम तट से कटईलवा तक करीब 59 करोड़ की लागत से बंधा का निर्माण कराया गया है। डेंजर जोन में नरसिंहडाड़ के पास सरयू नदी में हो रहे खनन को यदि तत्काल रोका नही जाता तो आने वाले दिनों में रामजानकी मार्ग सहित करीब आधा दर्जन गांव कटान की जद में आने की संभावना थी । रायल्टी के नाम पर सरकार को लाखों रुपये तो मिल रहे थे लेकिन बाढ़ के दिनों में सड़क और गांव को बचाने के लिए सरकार को करोड़ों रुपये खर्च करना पड़ सकता था । अधिकारी और राजनेता तो फायदा लेकर चले जाते लेकिन नदी के कटान का खामियाजा यहां की जनता को भुगतना पड़ता । हालत यह थी कि शीघ्र खनन स्थल का निरीक्षण कर यदि बालू खनन रोका नही जाता तो आगामी बाढ़ के दिनों में इसका परिणाम गंभीर हो सकता था । इसी रफ्तार से अगर बालू खनन होता रहता तो बरहज के भदिला और कुरह परसिया की तरह नरसिंहडाड़, कोटवा, देवसिया, छित्तरपुर भागलपुर, खेमादेई आदि तटवर्ती गावों का भी यही हश्र होता।
भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की इस भयावह स्थिति को देखते हुए ग्राम-नरसिंहडाड़, तहसील- बरहज , निवासी अनुराग कुमार ने तहसीलदार, एसडीएम तथा जिलाधिकारी , देवरिया से शिकायत करते हुए तत्काल खनन पर रोक लगाने की मांग की । जिस पर कोई उचित कार्यवाही नहीं हुई तो आवेदक ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से भी मामले में हस्तक्षेप की मांग की । माननीय आयोग ने मामले की जांच का आदेश जिलाधिकारी को दिया । लेकिन जांच के दौरान जब स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ तब प्रार्थी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लोकहित वाद दायर किया । 
जिसे न्यायालय ने गम्भीरता से लेते हुए 28 अगस्त 2023 तक उत्तर प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन से जबाव मांगा । इसके बाद राज्य सरकार व जिला प्रशासन काफी तेजी से हरकत में आया तथा तत्काल प्रभाव से सभी खनन पर रोक लगा दी गयी । रोक लगने के पश्चात खनन माफियाओं में हड़कम्प की स्थिति पैदा हो गयी तथा गांव के वर्तमान प्रधान आदि वादकारी अनुराग कुमार व उसके परिवार पर मुकदमा वापस करने का दबाव बनाने लगे । जिसकी शिकायत वादी ने जिला प्रशासन व न्यायालय में की लेकिन मुकदमा वापस नहीं लिया । इसके बाद धीरे-धीरे खनन और पट्टा आवंटन पर पूरी तरह प्रतिबंध लग गया । जिसका नतीजा यह हुआ कि लगभग 10-15 गांव बाढ़ के कटान से बच गए और कई हजार लोगों का उस स्थान से विस्थापन व हर साल होने वाला फसलों का नुकसान बंद हो गया । इससे आस- पास के लोगों के जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है तथा वह हर वर्ष बरसात के बाद आने वाली बाढ़ व कटान से होने वाले जान-माल के नुकसान के प्रति निश्चिंत हो चुके हैं । इधर माननीय उच्च न्यायालय ने इस राहत के साथ मामला बंद कर दिया है कि भविष्य में पुनः यदि अवैध पट्टा या खनन होता है तो वादी पुनः न्यायालय आ सकता है लेकिन चूंकि अभी इस मामले को और चलाये जाने की आवश्यकता नहीं है इसलिए इसे बंद किया जाता है ।
इस तरह सरयू नदी में अवैध खनन पर रोक लगे हुए एक वर्ष पूरा हो गया । इस मौके पर हर्ष जताते हुए मामले के अधिवक्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव , एडवोकेट हाई कोर्ट, इलाहाबाद ने कहा कि हमें इस मौके माननीय उच्च न्यायालय व मानवाधिकार आयोग को धन्यवाद देना चाहिए कि उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए लोकहित के इस मुद्दे पर त्वरित कार्यवाही की तथा जनता की बड़ी समस्या का निदान किया । साथ ही उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि भविष्य में भी यदि इस तरह का कोई अवैध खनन या अवैध पट्टा होता है तो हम उसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ते रहेंगे । 
वहीं मामले के वादी ग्राम नरसिंहडाड़ निवासी अनुराग कुमार ने कहा कि मामले की लड़ाई में हमें तमाम कठिनाइयां आईं । कई बार लालच दिया गया और कई नार दबाव बनाने का प्रयास किया गया । लेकिन जिला प्रशासन व माननीय उच्च न्यायालय के सहयोग से हम अपने कार्य को पूर्ण करने में सफल रहे । अब नदी की बाढ़ से मिट्टी का कटान बहुत हद तक बंद हो चुका है तथा आस- पास के हजारों लोग काफी सुकून से रह रहे हैं । 

rkpnews@desk

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