सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)बरठा चौराहा स्थित राष्ट्रीय समानता दल कार्यालय पर सोमवार, 2 फरवरी 2026 को अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा की जयंती राजनीतिक चेतना और संघर्ष के संकल्प के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने देश की मौजूदा शिक्षा और सामाजिक व्यवस्था पर तीखा हमला बोला।
राष्ट्रीय समानता दल उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष संजय दीप कुशवाहा ने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा केवल एक नेता नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन का विचार थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “राष्ट्रपति हो या मजदूर की संतान—सबकी शिक्षा एक समान” का नारा आज भी सत्ता और पूंजीपरस्त व्यवस्था को चुभता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर सरकारी शिक्षा को कमजोर किया जा रहा है ताकि गरीब, पिछड़े और शोषित समाज के बच्चे आगे न बढ़ सकें। यह असमान शिक्षा व्यवस्था देश की एकता और प्रगति दोनों के लिए घातक है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकारी शिक्षा व्यवस्था नहीं बचेगी तो देश के निर्धनतम परिवार का बच्चा कभी बराबरी का सपना नहीं देख पाएगा। बाबू जगदेव का संदेश साफ है—समान, मुफ्त और मजबूत सरकारी शिक्षा के लिए निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी।
सुजीत कुमार ने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा शोषित समाज की ऐसी आवाज थे, जिसने सत्ता के पाखंड और दोहरे चरित्र को बेनकाब किया। चंद्रिका पासवान ने कहा कि बाबू जगदेव के विचारों में पाखंडवाद सीधे तौर पर शोषण का औजार था, जिसे खत्म किए बिना सामाजिक न्याय संभव नहीं।
शेषमणि कुशवाहा ने कहा कि बाबू जगदेव देश में समान अवसर और सामाजिक बराबरी के सबसे मजबूत वैचारिक स्तंभ थे। अभय कुमार और उमेश कुशवाहा ने उन्हें सामाजिक क्रांति का योद्धा बताते हुए कहा कि आज जरूरत है उनके विचारों को आंदोलन में बदलने की।
कार्यक्रम का संचालन शत्रुघ्न कुशवाहा ने किया।
इस अवसर पर रामशकल कुशवाहा, मुस्तफा अंसारी, अल्लाउद्दीन, राजेश कुमार, मोहन कुशवाहा, गुड्डू कुशवाहा, राधेश्याम, रामनाथ कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
