कानपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) कानपुर के चर्चित अधिवक्ता अखिलेश दुबे एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। पहले भाजपा नेता रवि सतीजा से फर्जी मुकदमे के जरिए 50 लाख रुपये की जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तारी और अब वक्फ बोर्ड की बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जे का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
जानकारी के अनुसार, कानपुर की सबसे महंगी और संवेदनशील संपत्तियों में गिनी जाने वाली सिविल लाइंस स्थित लगभग चार हजार वर्गगज की जमीन पर अधिवक्ता अखिलेश दुबे और उनके गिरोह द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा कर लिया गया। इस जमीन की अनुमानित बाजार कीमत करीब 150 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि यह जमीन वक्फ बोर्ड के नाम पर दर्ज है, लेकिन वर्ष 2016 से 2024 के बीच फर्जी कागजात तैयार कर इसे निजी कब्जे में लेकर व्यवसायिक रूप से उपयोग में लाया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे खेल में जिन दस्तावेजों का सहारा लिया गया, उनमें मुन्नी देवी नाम की महिला की पावर ऑफ अटॉर्नी को आधार बनाया गया, जबकि रिकार्ड के अनुसार मुन्नी देवी का निधन वर्ष 2015 में ही हो चुका था।
इस मामले की शिकायत अधिवक्ताओं सौरभ भदौरिया और आशीष शुक्ला द्वारा पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी को दी गई, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। पूरे प्रकरण की जांच के लिए ADM सिटी, KDA सचिव और ACP बाबूपुरवा की तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई।
जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिससे यह मामला न सिर्फ एक जमीन कब्जे का प्रकरण बल्कि सुनियोजित भू-माफियागिरी और दस्तावेजों की कूटरचना का गंभीर उदाहरण बन गया है।
वर्तमान में प्रशासन द्वारा आगे की विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है, वहीं शहर भर में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कानूनी पेशे से जुड़ा एक अधिवक्ता इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त हो, यह न्याय व्यवस्था की मर्यादा पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
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