शादी-पार्टी में डीजे की तेज आवाज से रहें सावधान! बढ़ सकता है BP और दिल की धड़कन पर पड़ सकता है असर

तेज संगीत और घंटों शोर के बीच रहना शरीर की तनाव प्रतिक्रिया बढ़ा सकता है, हृदय रोग और हाई बीपी वाले लोगों को विशेष सावधानी की जरूरत
(राष्ट्र की परम्परा)। शादी-ब्याह, पार्टी, धार्मिक आयोजन और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में डीजे और तेज संगीत आज मनोरंजन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। तेज बीट पर डांस करना और घंटों लाउडस्पीकर की आवाज के बीच रहना लोगों को रोमांचित जरूर करता है, लेकिन अत्यधिक और लगातार शोर शरीर पर तनाव बढ़ा सकता है। खासकर ऐसे लोगों के लिए सावधानी जरूरी है, जिन्हें पहले से हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या अनियमित धड़कन जैसी समस्या है।
डॉ. वाचस्पति के अनुसार, तेज आवाज को लेकर यह समझना जरूरी है कि डीजे की आवाज को सीधे तौर पर हार्ट अटैक का कारण बताना सही नहीं है। हालांकि, बहुत तेज और लंबे समय तक शोर के संपर्क में रहने से शरीर की तनाव प्रतिक्रिया सक्रिय हो सकती है। इससे कुछ समय के लिए ब्लड प्रेशर और हृदय गति बढ़ सकती है। जिन लोगों में पहले से हृदय संबंधी जोखिम मौजूद हैं, उनके लिए ऐसी स्थिति अधिक परेशानी पैदा कर सकती है।
तेज आवाज शरीर पर कैसे डालती है असर?
बहुत तेज आवाज सुनने पर शरीर का सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो सकता है। इसके कारण तनाव से जुड़े हार्मोन का स्राव बढ़ सकता है और रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ सकता है। इसका परिणाम कुछ लोगों में अस्थायी रूप से ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि डीजे की आवाज सुनते ही किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आ जाएगा। शोर का प्रभाव उसकी तीव्रता, संपर्क की अवधि और संबंधित व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति सहित कई कारकों पर निर्भर करता है।
क्या तेज शोर से दिल की धड़कन प्रभावित हो सकती है?
शोर और हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर विभिन्न अध्ययनों में लगातार चर्चा हुई है। लंबे समय तक अत्यधिक शोर के संपर्क और कुछ हृदय संबंधी जोखिमों के बीच संबंध की बात सामने आई है। इनमें अनियमित हृदय धड़कन की स्थिति एट्रियल फिब्रिलेशन भी शामिल है।
एट्रियल फिब्रिलेशन में दिल की धड़कन सामान्य लय से हटकर अनियमित हो सकती है। यह स्थिति कुछ लोगों में रक्त के थक्के, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर जैसे जोखिमों से जुड़ी होती है। हालांकि, किसी व्यक्ति में ऐसी समस्या केवल डीजे या किसी एक शोर के कारण हुई, ऐसा सीधे तौर पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
तेज और लगातार शोर के दौरान विशेष सावधानी उन लोगों को बरतनी चाहिए, जिन्हें पहले से—
हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है।
हृदय संबंधी बीमारी है।
अनियमित धड़कन की समस्या है।
पहले हार्ट अटैक या स्ट्रोक हो चुका है।
तेज आवाज में चक्कर, घबराहट या अन्य परेशानी महसूस होती है।
ऐसे लोगों को डीजे या लाउडस्पीकर के बिल्कुल पास लंबे समय तक खड़े रहने से बचना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान बीच-बीच में शांत जगह पर जाना भी उपयोगी हो सकता है।
कितनी तेज आवाज से नुकसान का खतरा बढ़ता है?
शोर से होने वाला नुकसान केवल आवाज की तीव्रता पर निर्भर नहीं करता, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति कितनी देर तक उस आवाज के संपर्क में रहता है। सामान्य तौर पर लंबे समय तक करीब 85 डेसिबल या उससे अधिक शोर के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचने का जोखिम बढ़ सकता है।
शादी-पार्टी और डीजे कार्यक्रमों में आवाज का स्तर इससे काफी अधिक हो सकता है। ऐसे में स्पीकर के बिल्कुल सामने या बहुत करीब लंबे समय तक खड़े रहना शरीर और कानों दोनों के लिए उचित नहीं माना जाता।
डीजे और तेज संगीत के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
स्पीकर से दूरी बनाए रखें: जितना संभव हो, तेज आवाज वाले स्पीकर से कुछ दूरी पर रहें।
बीच-बीच में शांत जगह जाएं: लगातार कई घंटे तेज शोर में रहने के बजाय कुछ समय शांत वातावरण में बिताएं।
बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें: छोटे बच्चों और बुजुर्गों को अत्यधिक तेज आवाज वाले स्थान से दूर रखना बेहतर है।
शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें: यदि तेज आवाज के दौरान या उसके बाद सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, अचानक कमजोरी, बेहोशी, अत्यधिक घबराहट या दिल की धड़कन असामान्य महसूस हो, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लें: गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
मनोरंजन के साथ स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान
शादी, पार्टी या धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत और डीजे लोगों के मनोरंजन का हिस्सा हैं, लेकिन अत्यधिक तेज आवाज को सामान्य मान लेना उचित नहीं है। खासकर ऐसे लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए, जिन्हें पहले से हाई बीपी या हृदय संबंधी समस्या है।
निष्कर्ष: डीजे या तेज संगीत को अपने आप में हार्ट अटैक का सीधा कारण नहीं माना जा सकता। लेकिन अत्यधिक और लंबे समय तक शोर शरीर की तनाव प्रतिक्रिया बढ़ा सकता है तथा कुछ समय के लिए ब्लड प्रेशर और हृदय गति में वृद्धि हो सकती है। इसलिए तेज आवाज से उचित दूरी रखना और लंबे समय तक इसके संपर्क से बचना एक व्यावहारिक सावधानी है।
लेख/विशेषज्ञ टिप्पणी: डॉ. वाचस्पति
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। यह किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत चिकित्सकीय जांच या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। हृदय रोग, हाई बीपी या अनियमित धड़कन की समस्या वाले व्यक्ति अपने चिकित्सक की सलाह को प्राथमिकता दें।