——X——
देखो कितने पानी में हैं हम,
देखो कितने बिके हुये हैं हम,
इनको उनको सबको छोड़ो,
अपनी नियति तो देखें हम,
देखो कितने बिके हुए हैं हम।
प्रिंट मीडिया टेलीविज़न,
चौथा स्तंभ सबका है ग़म,
नहीं सहारा इनका माँगो,
इनमें भी अब नहीं है दम,
देखो कितने बिके हुये हैं हम।
स्वयं संघर्ष हमें करना है,
और किसी को नहीं देखना है,
किसी को कुछ भी नहीं पता है,
मध्यम वर्ग की जनता हैं हम,
देखो कितने बिके हुये हैं हम।
खबर नहीं दलालों की हैं,
खबर नहीं धनवानों की हैं,
कुत्ते और साँड़ नहीं दिखते हैं,
बेरोजगारी महँगाई का मातम,
देखो कितने बिके हुये हैं हम।
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
जाति-पाँति में दिखे भलाई,
नेक इरादे हैं नहीं किसी के,
आदित्य राजनीति के फूटे बम,
देखो कितने बिके हुये हैं हम।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र आदित्य
अपनों के दर्द में साथ खड़ा हुआ भारतीय गोरखा समाज, डमर बहादुर गुरुंग के नेतृत्व…
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी की मासिक बैठक शनिवार को बसियवां स्थित समाजवादी…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में विशेष बैक परीक्षा 14 सितंबर से…
तेज बहाव में महिला को मौत के मुंह से खींच लाए कक्षा 10 के छात्र,…
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।विकासखंड परतावल की ग्राम पंचायत बरियारपुर के बेलहिया टोले में बरसात का…
ब्रिक्स सम्मेलन 2026: मोदी-शी-पुतिन एक मंच पर, महंगे तेल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर…