भारतीय संबिधान के संबैधानिक मूल्यऔर मौलिक सिद्धान्त पर व्याख्यान

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग व रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संविधान दिवस के अवसर ‘‘भारतीय संविधान के संवैधानिक मूल्य और मौलिक सिद्धान्त’’ विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर, राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रूसी राम महानंदा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि, संविधान की प्रस्तावना हमारी संविधान की आत्मा है और उसमें दिये गये मूल्य स्वतन्त्रता, समानता, बंधुतत्व के आलोक में वर्तमान सरकारें काम कर रही है। उन्होने संविधान के मौलिक सिंन्द्धात पंथनिरपेक्षता व समाजवाद का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत का कोई अपना धर्म नहीं है, यहाँ सभी धर्मों को समान रूप से मानने व प्रचार-प्रसार की स्वतन्त्रता है। समाजवाद की परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा कि भारत ने समाजवादी विचारधारा को पोषित करने के लिए नीति निर्देशक तत्व मजबूत आधार प्रदान करते है, क्योकि यहॉ लोक कल्याण का अर्थ समाजिक और आर्थिक स्वतन्त्रता के साथ राजनीतिक स्वतन्त्रता की बात कही गयी है। भारतीय संविधान के मूल्यों और आदर्शों के व्यापक दृष्टिकोण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यहॉ पर्यावरण संरक्षण और अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के भी उपबन्ध है, जो वैश्विक जगत को एक संदेश देते है कि मानवता के कल्याण के लिए कैसे कार्य करना चाहिए। वर्तमान शासन व्यवस्था भारतीय संविधान के मूल्यों और आदर्शों के अनुरूप सकारात्मक दृष्टिकोण से कार्य कर रही है जो इसके समावेशी विकास के सूत्र में समझा जा सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान के मूल्य आदर्श और मौलिक सिद्वान्त में वह सब कुछ है, जो विश्व मानवता को शांति और समृद्धि को स्थापित करने के लिए चाहिए। उन्होंने कहा कि पश्चिम के देश महिलाओं को मताधिकार अपनी स्वतन्त्रता के बहुत बाद में दिये लेकिन भारत इस लैगिंक असमानता को संविधान लागू होने के समय ही दूर कर दिया था, और उन्हें मताधिकार प्रदान कर दिया था। उन्होंने भारतीय संविधान के मूल्यों को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में फ्रांसीसी क्रान्ति के स्वतन्त्रता, समानता, बन्धुत्व के नारे से भी जोड़ा और अमेरिकी विचारक जयर्फसन को उद्घृत किया। उन्होंने भारत के पंथ निरपेक्षता जैसे मौलिक सिद्धान्त को मैकियावेली के विचारों से जोड़ा और कहा कि भारत का अपना कोई निजी धर्म नहीं हैं। यहॉ पर धार्मिक मान्यताएं विशिष्ट रूप में है जो सर्व धर्म समभाव पर काम करती है।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना का वाचन राजनीति विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने किया। अतिथि परिचय एवं स्वागत राजनीति विज्ञान विभाग के प्रभारी इन्द्रेश पाण्डेय तथा कार्यक्रम का संचालन रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन विभाग के प्रभारी डॉ. आर.पी. यादव ने किया।
उक्त कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. अखिल श्रीवास्तव, विकास पाठक, डॉ. रूक्मिणी चौधरी, डॉ. सुनील सिंह सहित छात्र/छात्राएॅ व कर्मचारीगण उपस्थित रहें।

rkpnews@somnath

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