नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया आलोचना से आहत और निराश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खुद को भारतीय किसानों का हिमायती बताने के प्रयास पर कड़ा प्रहार किया। रमेश ने 2020-21 में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन को याद दिलाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने उस समय संसद में आंदोलनकारियों को “आंदोलनजीवी” कहकर उनका मज़ाक उड़ाया था, जबकि इस आंदोलन के दौरान 700 से अधिक किसानों की मौत हो गई थी।
रमेश ने आरोप लगाया कि इतने बड़े आंदोलन और किसानों की मौत के बावजूद प्रधानमंत्री ने उनके प्रति अफ़सोस या सहानुभूति के एक भी शब्द नहीं कहे। उन्होंने कहा कि किसान संगठन आज भी एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं, जिसकी गणना कुल उत्पादन लागत (सी2) में 50 प्रतिशत मुनाफ़ा जोड़कर की जानी चाहिए, साथ ही ठोस कर्ज़ राहत भी दी जानी चाहिए। इन अहम मुद्दों पर प्रधानमंत्री अब तक पूरी तरह चुप हैं, जबकि इन्हें देश के पूर्व उपराष्ट्रपति तक ने उठाया था।
कांग्रेस नेता ने यह भी याद दिलाया कि नवंबर 2019 में प्रधानमंत्री मोदी भारत को क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) व्यापार समझौते में शामिल करने के लिए तैयार थे, जिससे भारतीय किसानों और डेयरी उत्पादकों को भारी नुकसान हो सकता था। रमेश के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी और किसान संगठनों के निरंतर दबाव के कारण प्रधानमंत्री को अंतिम समय में पीछे हटना पड़ा।
उन्होंने तंज कसा कि ट्रंप के हमलों से आहत और दबाव में आए प्रधानमंत्री अब खुद को किसानों का सबसे बड़ा समर्थक बताने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस बारे में किसी को कोई भ्रम नहीं है।
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