मासूम बच्चों के हाथों में मजदूरी के छाले नहीं बल्कि कलम और किताब होनी चाहिए – मुसरफ खान

आगरा(राष्ट्र की परम्परा)
विश्व बालश्रम निषेध दिवस यानी बाल मजदूरी मनाही दिवस कहते हैं। विश्व बालश्रम निषेध दिवस को अंग्रेजी में ‘वर्ल्ड डे अगेंस्ट चाइल्ड लेबर’ कहा जाता हैं। यह दिवस हर साल 12 जून को बाल मजदूरी के प्रति विरोध एवं जगरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
वरिष्ठ समाजसेवी मुसरफ खान ने इस सन्दर्भ में बताया कि सभ्य समाज व राष्ट्र के लिए बाल श्रम एक अभिशाप हैं। आइए, विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर आज़ समाज को बाल श्रम से मुक्त करने हेतु संकल्पित हों। बच्चों के जीवन को शिक्षा के प्रकाश में आलौकित कर उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध हो। यह दिवस इसलिए भी बहुत अहम है, क्योंकि यह बच्चों के विकास और उनके हक के लिए आवश्यक चीजों की ओर ध्यान केंद्रित करता है। बालश्रम के विरोध में यह दिवस पूरे विश्व में मनाया जाता है। वहीं, विश्व में हर साल बाल मजदूरी कराने की संख्या बढ़ रही है। इसी बाल मजदूरी अथवा बालश्रम को रोकने के लिए हर साल विश्व बालश्रम निषेध दिवस मनाया जाता है।
खान ने बताया कि हम सभी के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि बच्चों को बाल मजदूरी करने से रोके और उनसे बाल अवस्था में कार्य कराकर उनके सपने ना छीने। उनके हाथों में मजदूरी करा के छाले नहीं होनी चाहिए बल्कि, कलम और किताब होनी चाहिए। यह हमारे देश के भविष्य हैं और इन्हें बाल श्रम करने से रोकना हम सबका कर्तव्य है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने बाल श्रम खत्म करने के लिए आवश्यक कार्रवाई के लिए वर्ष 2002 में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस का शुभारंभ किया था। बाल मजदूरी के प्रति विरोध एवं जगरूकता फैलाने के उद्देश्य से विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। हमारी संस्था द्वारा इस दिन शहर के विभिन्न क्षत्रों में विभिन्न प्रकार के अभियान चलाती हैं, जैसे कई जगहों में अनाध बच्चों को खाना खिलाया, किताब, कॉपी, पेंसिल, रबड़ आदि की किट बच्चों को किताबे उपहार में देती हैं तथा गरीब बच्चों को स्कूल में दाखिला भी करवाती हैं। हमारी संस्था द्वारा लोगो में बाल श्रम के प्रति जागरूकता पैदा करने तथा उन्हें शिक्षा की ओर ध्यान देने के उद्देश्य से काम करती हैं। बालश्रम की समस्या का समाधान एवं प्रत्येक बच्चे को उसका अधिकार तक पहुंचाना इस दिवस का उद्देश्य है।

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