नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) भारत ने अज़रबैजान के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उसने दावा किया था कि पाकिस्तान से दोस्ती के चलते भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में उसकी पूर्णकालिक सदस्यता पर रोक लगा दी है। शुक्रवार को विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब दिया।
जायसवाल ने कहा कि “एससीओ का विस्तार एक सतत प्रक्रिया है और इस पर सभी सदस्य देशों की सहमति से ही निर्णय लिया जाता है। इस साल आर्मेनिया और अज़रबैजान दोनों ने सदस्यता के लिए आवेदन किया था। लेकिन समय की कमी के कारण तियानजिन में हुई बैठक में इस मुद्दे पर निर्णय नहीं लिया जा सका। यह मामला अभी भी समूह द्वारा विचाराधीन है।”
उन्होंने दो टूक कहा कि भारत किसी भी देश के खिलाफ किसी प्रकार की “बदले की भावना” से काम नहीं करता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी दोहराया कि एससीओ का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है और नए देशों की सदस्यता पर निर्णय सामूहिक सहमति से ही संभव है।
गौरतलब है कि अज़रबैजान ने हाल ही में आरोप लगाया था कि पाकिस्तान से उसके करीबी संबंधों की वजह से भारत उसकी पूर्ण सदस्यता में अड़चन डाल रहा है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि अज़रबैजान और आर्मेनिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद के कारण भी सदस्य देशों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद मौजूद हैं।
फिलहाल, एससीओ में रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, कज़ाख़स्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान पूर्ण सदस्य हैं। संगठन का विस्तार एशियाई राजनीति और सुरक्षा समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है।
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