मेरी रचना, मेरी कविता
——X——
मैं स्वर उधार माँगता हूँ,
बदले में लिख कर देता हूँ,
मेरे गीतों को स्वर दे दो,
मैं यही अर्चना करता हूँ।
कोई तो हम में होगा,
जो गा के हमें सुनाएगा,
कोई तो ऐसा होगा,
मेरे गीत गुन गुनायेगा।
मेरे गीतों की चर्चा,
कहीं तो होती होगी,
मेरी ये कृष्ण भावना,
किसको मनभावन होगी।
कोई तो इन गीतों को,
अपने स्वर में गाएगा,
आदित्य की प्रेमभक्ति,
को कोई तो सरग़म देगा।
मैं कविता लिख सकता हूँ,
गीतों की रचना कर सकता हूँ,
आदित्य नहीं पर अपने शब्दों,
को, अपना ही स्वर दे सकता हूँ।
मेरे मन मानस को कोई तो,
अपना होगा जो समझेगा,
आदित्य के गीतों को गाकर,
अपने स्वर में हमें सुनायेगा।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र, आदित्य
लखनऊ
कुशीनगर में दर्दनाक हादसा: पोखरी में डूबने से 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत, गाय की…
प्राकृतिक खेती पर कार्यशाला आयोजित संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। केंद्र सरकार के 12…
एसएसपी ने महत्वपूर्ण सर्किल की सौंपी जिम्मेदारी, अरुणकुमार एस को सीओ लाइन का प्रभार गोरखपुर(राष्ट्र…
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ में 21 जून को आयोजित…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शैक्षिक सत्र 2025-26 का दीक्षान्त समारोह…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में…