तेरही के विवाद ने ली जान: सुरेंद्र राम की इलाज के दौरान मौत, गांव में पसरा मातम


सिकंदरपुर / बलिया (राष्ट्र की परम्परा)तेरही जैसे शांतिपूर्ण सामाजिक कार्यक्रम में हुई एक छोटी सी कहासुनी ने अंततः एक परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया। 15 अप्रैल को हुए खूनी विवाद में गंभीर रूप से घायल 50 वर्षीय सुरेंद्र राम ने रविवार की रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस दुखद खबर के बाद पूरे गांव में मातम छा गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुरेंद्र राम तेरही कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान किसी बात को लेकर उनके चचेरे भाई राजकुमार दास से मामूली कहासुनी हो गई। देखते ही देखते यह विवाद इतना बढ़ गया कि राजकुमार दास ने गुस्से में आकर कुल्हाड़ी से सुरेंद्र राम पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोग दहशत में आ गए।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों ने घायल सुरेंद्र राम को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। हालांकि परिजन उन्हें जिला अस्पताल न ले जाकर मऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराए। वहां एक दिन तक इलाज चला, लेकिन उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
डॉक्टरों ने हालत बिगड़ती देख उन्हें वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। वाराणसी में इलाज के दौरान रविवार की रात उनकी मृत्यु हो गई। इस खबर ने परिवार और गांव के लोगों को झकझोर कर रख दिया।

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सोमवार सुबह पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। देर शाम तक परिजन शव को गांव लेकर पहुंचे, जहां गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार की तैयारी की गई। जानकारी के अनुसार, हल्दी रामपुर मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
मृतक सुरेंद्र राम अपने पीछे पत्नी, दो पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे हैं।
घटना के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और उसी दिन जेल भेज दिया। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। इस घटना ने समाज में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कैसे एक सामान्य पारिवारिक कार्यक्रम में हिंसा इतनी भयावह रूप ले सकती है।
यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि छोटी-छोटी बातों को समय रहते सुलझाना कितना जरूरी है। गुस्से और आवेश में उठाया गया एक कदम कई जिंदगियों को प्रभावित कर सकता है।

Editor CP pandey

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