Wednesday, May 27, 2026
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धोखाधड़ी और लूट के मामले में उच्च न्यायालय ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर लगाई रोक

उतरौला/बलरामपुर(राष्ट्र की परम्परा)
उतरौला क्षेत्र के ग्राम भैरमपुर में 34 साल पहले आवासीय पट्टे को लेकर उठे विवाद में उच्च न्यायालय ने आरोपी हबीब अहमद, मैराज अहमद और जुलेखा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। मामला 1992 का है जब तहसील प्रशासन ने मैराज अहमद और जुलेखा को आवासीय पट्टा दिया था। इस पट्टे के खिलाफ उमेश चन्द्र नामक व्यक्ति ने एडीएम, आयुक्त और उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। हालांकि, सभी न्यायालयों ने इस पट्टे को वैध माना और इसे बहाल रखा।
विवाद तब और गंभीर हो गया जब उमेश चन्द्र ने आरोपियों के खिलाफ तहसील प्रशासन द्वारा आवंटित पट्टे को धोखाधड़ी और लूट का आधार बनाते हुए न्यायालय में धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत एक मामला दर्ज करने का आवेदन किया। मुंसिफ न्यायालय, उतरौला ने उमेश चन्द्र की याचिका को स्वीकार करते हुए उतरौला पुलिस को आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।
इसके अनुपालन में, उतरौला पुलिस ने 28 जुलाई 2022 को हबीब अहमद, मैराज अहमद और जुलेखा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 406, 467, 468, 471, 34, 323, 504, 506, और 392 के तहत धोखाधड़ी, लूट, और अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया और विवेचना शुरू की।
जांच के दौरान, उतरौला पुलिस ने न्यायालय से आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी प्राप्त कर लिया। इस बीच, आरोपियों हबीब अहमद, मैराज अहमद और जुलेखा ने पुलिस की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
उच्च न्यायालय ने मामले से जुड़े सभी अभिलेखों और पुलिस द्वारा प्रस्तुत तथ्यों की समीक्षा की। तथ्यों की गहन जांच के बाद, उच्च न्यायालय ने फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस द्वारा की जा रही सभी कार्रवाई को स्थगित कर दिया है। न्यायालय के इस आदेश से आरोपियों को बड़ी राहत मिली है और पुलिस कार्रवाई पर अस्थायी रोक लग गई है।
अब मामले की आगे की प्रक्रिया और निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। आरोपियों और याचिकाकर्ता उमेश चन्द्र के बीच यह विवाद 34 साल से लंबित है और न्यायालय के अगले आदेश के साथ ही इसकी अगली दिशा तय होगी।

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