महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भक्त और परमात्मा के बीच विश्वास की डोर है और भक्तों के विश्वास की रक्षा परमात्मा स्वयं करते हैं। परमात्मा जब भक्तों का अनुरागयुक्त समर्पण देखते हैं तो स्वयं दौड़े चले आते हैं। उक्त बातें कथावाचक उमेश चन्द्र मिश्र ने कटहरा में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अन्तिम दिन ध्रुव व भरत के चरित्र की कथा कहते हुए कही। सदर ब्लाक के ग्राम पंचायत कटहरा में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अन्तिम दिन पं0 उमेश चन्द्र मिश्र ने भक्त ध्रुव की कथा को विस्तार से सुनाते हुए कहा कि जब भक्तों के अंदर विश्वास, अनुराग और समर्पण का भाव होता है, तब ईश्वर क्षण भर भी भक्तों को प्रतीक्षा नहीं कराते और भक्त को दर्शन देते हैं। उन्होंने कहा कि जब ध्रुव ने बाल्यावस्था में जंगल में जाकर ईश्वर का ध्यान लगाया तो भगवान ने आकर उन्हें दर्शन दिये।जब भगवान भक्त के वश में होते हैं तो बहुत सारी लीलाओं का दर्शन कराते हैं। उन्होंने कहा कि भक्त जब-जब ईश्वर को अनुराग व समर्पण के साथ पुकारता है तो भगवान क्षण मात्र भी देर नहीं करते बल्कि नंगे पैर ही दौड़े चले आते हैं। कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कथा व्यास ने कहा कि भगवान के चरित्र के श्रवण से व्यक्ति का लोक और परलोक दोनों सवर जाते हैं। श्रीमद् भागवत की महिमा को बताते हुए उन्होंने कहा श्रीमद् भागवत के श्रवण मात्र से जीव के सभी पापों का नाश हो जाता है और उसकी संसार में बार-बार के आवागमन कुचक्र से मुक्ति हो जाती है।उन्होंने भरत के चरित्र को सुनाते हुए भक्ति का संदेश दिया।
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