Thursday, April 16, 2026
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जैविक उत्पादन से कृषक को बनाया जायेगा आत्मनिर्भर

जनपद के पांच विकास खण्डों के अंतर्गत 43 ग्राम पंचायतों में प्राकृतिक तरीके से कराई जाएगी जैविक खेती

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा )उप कृषि निदेशक सत्येन्द्र सिंह चौहान द्वारा बताया गया कि प्राकृतिक संसाधनों को सफलतापूर्वक अपनाने के लिए पशु और पौधे आधारित नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिग योजनान्तर्गत जनपद के 05 विकास खण्डो दोहरीघाट, घोसी, फतेहपुर मण्डांव, बड़रांव व परदहां के 43 ग्राम पंचायतों में प्राकृतिक तरिके से जैविक खेती कराया जायेगा। इस सम्बन्ध में कृषको को आत्म निर्भर बनाने व कम लागत में जैविक उत्पाद कर सकेगे। प्राकृतिक खेती में खेत की उर्वरा शक्ति की वृद्धि करने के लिए खेतो में जीवामृत, बीजामृत, घन जीवामृत के साथ ही कीट नियंत्रण के लिए ब्रहमास्त दशपर्डी और नीम आयल का प्रयोग किया जाता है। इन सभी इनपुट के उत्पादन की आपूर्ति के लिए जैव इन-पुट संसाधन केन्द्र (वी०आर०सी) की स्थापना की जायेगी। सम्पूर्ण लागत पर एक लाख रूपये का अनुदान देय है। जनपद के ऐसे कृषक, उद्यमी, एफ०पी०ओ०, सहकारी समिति जो उक्त कार्य में अभिरूचि रखते है, वह दिनांक 06 जून 2025 तक कृषि विभाग कार्यालय मऊ से सम्पर्क कर कार्य प्रारम्भ कर सकते है। उन्होंने बताया कि ऐसे कृषक/उद्यमी/एफ०पी०ओ० के सदस्य कृषक पूर्व से ही प्राकृतिक तरिके से खेती करने का अनुभव हो।
कृषक/सदस्य एन०एफ० जैव इनपुट का प्रयोग अपने खेतो में करता हो। गौ-संसाधन पशुधन तक पहुँच सुगमता से हो तथा इनपुट तैयार करने के लिए पर्याप्त स्थान हो।

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